Uttarakhand: 10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा देना पड़ा भारी, कंज्यूमर कोर्ट ने डिलीवरी ऐप और रेस्टोरेंट पर लगाया ₹10,520 का जुर्माना
मामले के अनुसार, पीड़ित ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए 10 इंच का पिज्जा ऑर्डर किया था, जिसके लिए ₹505 का भुगतान किया गया था. डिलीवरी मिलने पर जब ग्राहक ने पिज्जा का आकार मापा, तो वह केवल 7 इंच का निकला.
Uttarakhand Consumer Commission: उत्तराखंड के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाते हुए एक ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट पर ₹10,520 का जुर्माना लगाया है. यह फैसला एक ग्राहक की शिकायत पर सुनाया गया है, जिसने ऑनलाइन ऐप से 10 इंच का पिज्जा ऑर्डर किया था, लेकिन उसे केवल 7 इंच का पिज्जा डिलीवर किया गया.
आर्डर से 3 इंच छोटा निकला पिज्जा
मामले के अनुसार, पीड़ित ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए 10 इंच का पिज्जा ऑर्डर किया था, जिसके लिए ₹505 का भुगतान किया गया था. डिलीवरी मिलने पर जब ग्राहक ने पिज्जा का आकार मापा, तो वह केवल 7 इंच का निकला.
ग्राहक ने तुरंत ऐप के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क कर इस गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई और रिफंड की मांग की. हालांकि, डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने समस्या स्वीकार करने के बावजूद रिफंड देने से मना कर दिया. इसके बाद ग्राहक ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH), सीपीजीआरएएमएस (CPGRAMS) पोर्टल और कानूनी नोटिस के जरिए समाधान की कोशिश की. राहत न मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया.
डिलीवरी ऐप की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने दलील दी कि वह केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) के रूप में कार्य करता है, जो ग्राहकों को रेस्टोरेंट से जोड़ता है. कंपनी ने दावा किया कि भोजन तैयार करने, पैक करने या मापने में उसकी कोई सीधी भूमिका नहीं होती.
आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि डिलीवरी प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ नहीं है, बल्कि ऑर्डर स्वीकार करने से लेकर डिलीवरी पूरी करने तक पूरी सेवा श्रृंखला का एक अभिन्न हिस्सा है. इसलिए, विज्ञापन के अनुसार उत्पाद न देने के लिए प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट दोनों संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं.
45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान
उपभोक्ता आयोग ने डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट को आदेश दिया है कि वे 45 दिनों के भीतर संयुक्त रूप से उपभोक्ता को ₹10,520 की राशि का भुगतान करें.
इस कुल राशि में पिज्जा की कीमत ₹505 और डिलीवरी शुल्क ₹15 का पूर्ण रिफंड (कुल ₹520) शामिल है. इसके अलावा, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में ₹5,000 तथा कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए ₹5,000 की राशि शामिल की गई है.