Majhi Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार ने 'मुख्यमन्त्री माझी लाडकी बहीण योजना' में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा किया है. इसके तहत प्रारंभिक रूप से लगभग 26 लाख महिलाओं को अयोग्य लाभार्थी घोषित किया गया है. यह जानकारी सोमवार, 25 अगस्त 2025 को राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने दी. सरकार के इस खुलासे के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने योजना में 4800 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है और मामले में जांच, श्वेतपत्र, और सीएजी (नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) रिपोर्ट जारी करने की मांग की है.
26 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित
दरअसल प्रारंभिक जाँच और भौतिक सत्यापन महाराष्ट्र सरकार के सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग ने प्रारंभिक जाँच में पाया कि 26 लाख लाभार्थी योजना के मानदंडों के अनुसार पात्र नहीं हैं. ये लाभार्थी राज्य के सभी जिलों से संबंधित हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन लाभार्थियों की प्रारंभिक सूची को भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए जिला प्रशासन को भेज दिया है. क्षेत्रीय स्तर पर पात्रता की गहन जाँच चल रही है, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन से लाभार्थी पात्र हैं और कौन अयोग्य. यह भी पढ़े: Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहिन योजना से हटाना चाहते है नाम? जानें आसान तरीका
अदिति तटकरे ने कार्रवाई की बात भी कही
मामले में मंत्री अदिति तटकरे ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अयोग्य लाभार्थियों के खिलाफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के मार्गदर्शन में उचित कार्रवाई की जाएगी. पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा.
पुरुषो ने भी लिया इस योजना का लाभ
तटकरे ने यह भी बताया कि कुछ लाभार्थी एक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे, और कई परिवारों में दो से अधिक लाभार्थी पाए गए. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में पुरुषों ने भी इस योजना के लिए आवेदन किया, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए है. तटकरे ने कहा कि योजना के तहत लगभग 2.25 करोड़ लाभार्थी पात्र हैं.
घोटाले की जांच हो: सुप्रिया सुले
सुप्रिया सुले का 4800 करोड़ के घोटाले का आरोप एनसीपी (एसपी) नेता और बारामती सांसद सुप्रिया सुळे ने लाडकी बहीण योजना में 4800 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है. पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “लगभग 25 से 26 लाख नाम योजना से हटा दिए गए हैं, जिनमें से दो लाख अकेले पुणे से हैं. सरकार बताए कि पहले फॉर्म किन आधारों पर स्वीकार किए गए, और अब किन मानदंडों पर नाम हटाए गए हैं?”
पात्रता और सॉफ्टवेयर पर भी उठाये सवाल
पात्रता और सॉफ्टवेयर पर सवाल सुप्रिया सुले ने योजना की प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर की सटीकता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “क्या सरकार पुरुष और महिला आवेदकों में अंतर नहीं कर सकी? इस योजना के लिए किस तरह का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हुआ, और इसे किसने लागू किया? यह एक गंभीर मामला है, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिए.
सीएम फडणवीस ने E-KYC की कही बात
हालांकि ई-केवाईसी की बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही इस योजना में गड़बड़ी की जाँच के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया लागू करने की बात कही थी, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गड़बड़ी करने वालों की पहचान की जा सके और केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिले.













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