ईरान ने आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए मल्लिकार्जुन खरगे, सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा को दिया निमंत्रण
ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफन समारोहों में शामिल होने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया है. वहीं, भारत सरकार की ओर से एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल तेहरान जाएगा.
तेहरान/नई दिल्ली: ईरान सरकार (Government of Iran) ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के अंतिम संस्कार और दफन समारोहों में शामिल होने के लिए भारत के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है. सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge), पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) शामिल हैं. यह बहु-दिवसीय धार्मिक और राजकीय समारोह 4 जुलाई से 9 जुलाई 2026 के बीच ईरान और इराक के विभिन्न पवित्र शहरों में आयोजित होने जा रहा है. यह भी पढ़ें: US Tariff: अमेरिका का बड़ा प्रस्ताव, भारत समेत 60 देशों से आयातित वस्तुओं पर 12.5% टैरिफ लगाने की तैयारी
विपक्ष को सीधे कूटनीतिक पहुंच
ईरान द्वारा भारत के विपक्षी नेताओं को सीधे भेजा गया यह निमंत्रण तेहरान की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह सत्ता परिवर्तन के इस संवेदनशील दौर में नई दिल्ली के सभी राजनीतिक पक्षों के साथ संबंध मजबूत रखना चाहता है.
गौरतलब है कि ईरान के सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई का इसी वर्ष फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद निधन हो गया था. महीनों तक चली मध्यवर्ती राजकीय प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय शोक की अवधि के बाद, अब उनके अंतिम संस्कार की औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल
ईरान सरकार ने इस समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सीधा निमंत्रण भेजा था, लेकिन प्रधानमंत्री की अन्य पूर्व-निर्धारित अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के चलते भारत सरकार ने तेहरान के लिए एक विशेष आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नामित किया है.
भारत सरकार का प्रतिनिधित्व बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा करेंगे. प्रतिनिधिमंडल का यह स्वरूप दर्शाता है कि नई दिल्ली पश्चिम एशिया की जटिल भू-राजनीति को संतुलित करते हुए तेहरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को स्थिरता देना चाहती है.
ईरान ने भारतीय विपक्षी नेताओं को निमंत्रण भेजा
Iran invites Congress' Mallikarjun Kharge, Salman Khurshid, Pawan Khera for burial ceremonies of late leader Ayatollah Ali Khamenei:Sources pic.twitter.com/1KNz16oqG0
— Press Trust of India (@PTI_News) July 1, 2026
भारत-ईरान संबंधों का रणनीतिक महत्व
वैश्विक प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद, भारत ने हमेशा ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता दी है. ईरान भारत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक साझेदार है, जो पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया तक भारतीय माल पहुँचाने का सीधा मार्ग प्रदान करता है.
इस साझेदारी के केंद्र में चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) का विकास और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) शामिल हैं. कूटनीतिक हलकों का मानना है कि ईरान के नए नेतृत्व, विशेष रूप से मुजतबा खामेनेई के सकारात्मक बयानों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध आने वाले समय में और विस्तार ले सकते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2026 08:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

