देश की खबरें | उत्तर भारत में कई दिनों की बारिश के बाद मौसम में सुधार, अब सारा ध्यान राहत एवं बचाव कार्यों पर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कई दिनों तक भारी बारिश का दौर झेलने के बाद उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में मौसम में सुधार हुआ है, जिसके बाद अधिकारियों ने फंसे हुए पर्यटकों को निकालने, मुख्य मार्गों पर यातायात परिचालन बहाल करने और नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से रोकने के लिए बुधवार को युद्धस्तर पर कार्य शुरू कर दिया।

नयी दिल्ली, 12 जुलाई कई दिनों तक भारी बारिश का दौर झेलने के बाद उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में मौसम में सुधार हुआ है, जिसके बाद अधिकारियों ने फंसे हुए पर्यटकों को निकालने, मुख्य मार्गों पर यातायात परिचालन बहाल करने और नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से रोकने के लिए बुधवार को युद्धस्तर पर कार्य शुरू कर दिया।

आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक, बुधवार रात आठ बजे समाप्त हुए 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि पंजाब और हरियाणा में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य के कसोल में फंसे कम से कम दो हजार पर्यटकों को निकाल लिया गया और भूस्खलन व बाढ़ की वजह से लाहौल में फंसे 300 से ज्यादा पर्यटक वाहन अपने-अपने गंतव्य स्थानों की ओर रवाना हो चुके हैं।

सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली में यमुना का जलस्तर बुधवार को 207.83 मीटर के स्तर तक पहुंच गया और इस तरह से 1978 का 207.49 मीटर का रिकार्ड टूट गया।

दिल्ली में पिछले तीन दिनों में यमुना का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ा है। यमुना का जलस्तर रविवार पूर्वाह्न ग्यारह बजे 203.14 मीटर था, जो सोमवार शाम पांच बजे तक बढ़कर 205.4 मीटर हो गया। यमुना का जलस्तर 205.33 मीटर के खतरे के निशान को उम्मीद से 18 घंटे पहले ही पार कर गया।

दिल्ली पुलिस ने बाढ़ संभावित इलाकों में चार और उससे ज्यादा लोगों के जमा होने और लोगों के समूह में आवागमन को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी है।

जल मंत्री सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि दिल्ली सरकार हालात से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘हम हालात पर नजर रखे हुए हैं और सभी संभावित कदम उठाए जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि यमुना का जलस्तर बढ़ने पर हालात को काबू करने के लिए निचले इलाकों में तटबंधों का निर्माण किया जा रहा है ताकि राजधानी के दूसरे हिस्सों में बाढ़ के पानी को घुसने से रोका जा सके।

मजनू का टीला, कश्मीरी गेट और वजीराबाद समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे यातायात बाधित हो गया।

सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जलस्तर में तेज वृद्धि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश और सप्ताहांत में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण हुई।

निचले इलाकों में रह रहे लोगों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है और बचाव व राहत कार्य के लिए 45 नौकाएं तैनात की गई हैं।

यमुना का जलस्तर अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के मद्दनेजर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया और कहा कि राजधानी में बाढ़ की खबर दुनिया के लिए अच्छा संदेश नहीं है।

दिल्ली में हालात जल्द सुधरने की संभावना नहीं है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शहर में ब‍ुधवार को हल्की से मध्यम बारिश और अगले चार से पांच दिनों तक लगातार बारिश का पूर्वानुमान जताया है।

आईएमडी ने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले दो दिन तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है और उसके बाद बारिश में कमी आएगी।

हिमाचल प्रदेश में मंगलवार शाम को कुल्लू-मनाली सड़क खुलने के बाद लगभग 2,200 फंसे हुए वाहन कुल्लू पार कर गए।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक ट्वीट में कहा कि कसोल में फंसे 2,000 से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि कसोल-भुंतर सड़क पर डूंखरा भूस्खलन को साफ करने के लिए टीमें अथक प्रयास कर रही हैं और जिला प्रशासन राहत प्रयासों का समन्वय कर रहा है।

उन्होंने कहा कि लाहौल में फंसे 300 से अधिक पर्यटक वाहन भी अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए हैं। सुक्खू ने लाहौल और स्पीति के चंद्रताल में फंसे पर्यटकों को निकालने को एक "चुनौतीपूर्ण कार्य" बताया।

शनिवार से लाहौल और स्पीति जिले के चंद्रताल में फंसे लगभग 300 लोगों, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, को मंगलवार को हवाई मार्ग से भुंतर ले जाया गया।

अधिकारियों के अनुसार, कुल 873 सड़कें अभी भी वाहनों के आवागमन के लिए अवरुद्ध हैं।

स्थानीय मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से भारी बारिश हुई। विभाग के अनुसार धौला कुआं में 144.5 मिलीमीटर, रेनुका में 87 मिलीमीटर, रिकांगपिओ में 42 मिलीमीटर, कोटखाई में 30 मिलीमीटर, हमीरपुर में 16.5, शिमला में 13.5, धर्मशाला में 13 मिलीमीटर और कल्पा में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मौसम कार्यालय ने राज्य में 15 और 16 जुलाई को भारी बारिश, गरज चमक के साथ बौछारे पड़ने और बिजली गिरने का 'येलो अलर्ट' जारी किया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में लगातार बारिश के बीच लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।

उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त की ओर से बुधवार रात 8 बजे जारी एक बयान के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हो गई।

बयान में कहा गया है कि इनमें से नौ लोगों की मौत डूबने से और एक-एक की मौत बिजली गिरने, सांप के काटने और "भारी बारिश" के कारण हुई।

हरियाणा में पुलिस ने कहा कि राज्य में, अंबाला छावनी की एक आवासीय कॉलोनी में पानी से भरी सड़क से गुजरते समय एक व्यक्ति की करंट लगने से मौत हो गई और बुधवार को अंबाला शहर में तीन शव पानी में तैरते मिले।

हरियाणा में अंबाला जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां शनिवार और सोमवार के बीच भारी बारिश हुई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बारिश से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि उन गरीबों और अन्य लोगों को भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिनके घर बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

लगातार बारिश के कारण कई जिलों में घरों में पानी भर गया और फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हुआ। यमुना में जलस्तर में वृद्धि के कारण करनाल जिले के बड़े पैमाने पर खेत में पानी भर गया है।

अधिकारियों ने कहा कि पंजाब में, सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों ने बुधवार को सुल्तानपुर लोधी शहर में बाढ़ प्रभावित मांड इलाके से 223 से अधिक लोगों को निकाला।

उन्होंने बताया कि अब तक पटियाला, रूपनगर, मोगा, लुधियाना, मोहाली, एसबीएस नगर और फतेहगढ़ साहिब जिलों से हजारों लोगों को निकाला गया है।

सरकारी आंकड़े के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब में बारिश से संबंधित घटनाओं के कारण मरने वालों की संख्या 18 है।

अंबाला, यमुनानगर, कुरूक्षेत्र, पटियाला, रूपनगर, जालंधर, एसबीएस नगर और मोहाली दोनों राज्यों के कुछ प्रभावित जिले हैं।

सरकारों ने दोनों राज्यों के कई जिलों में राहत आश्रय स्थापित किए हैं।

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