देश की खबरें | यूडीएफ ने केरल के मुख्यमंत्री से हाथी के हमले के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

तिरुवनंतपुरम, 12 फरवरी केरल में कांग्रेस नीत विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने बुधवार को जंगली जानवरों के हमलों और मुनंबम वक्फ भूमि विवाद के मुद्दे को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।

विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने वित्त वर्ष 2025-2026 के बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि बुधवार को हाथी के हमले में एक और व्यक्ति की मौत हो गई।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों में हाथियों के हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर चार हो गई है एवं पिछले सप्ताह में ऐसे हमले में पांच लोगों की मौत हुई ।

बुधवार तड़के वायनाड जिले में जंगली हाथी के हमले में बालकृष्णन (27) नामक एक व्यक्ति की मौत हो गई।

सतीशन ने मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई दल के गठन या हाथियों के लिए जंगल के अंदर भोजन और पानी उपलब्ध कराने जैसे तत्काल कुछ कदम उठाने का अनुरोध किया ताकि तापमान बढ़ने पर वे बाहर न निकलें तथा और लोगों की मौत को रोका जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग डरे हुए हैं। सरकार को कार्रवाई करनी होगी। उसकी मौजूदगी वहां नजर आनी चाहिए। भगवान के लिए, कृपया कुछ कीजिए।..’’

उन्होंने मुनंबम मुद्दे की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया और कहा कि विजयन को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और लोगों को आश्वस्त करना चाहिए कि इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।

मुनंबम भूमि विवाद की जांच के लिए केरल सरकार द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति सी एन रामचंद्रन नायर आयोग ने अस्थायी रूप से अपना कार्य बंद कर दिया है।

एर्नाकुलम के केरल वक्फ संरक्षण वेधी ने आयोग की नियुक्ति के आदेश को चुनौती दी थी जिसके जवाब में राज्य सरकार ने हाल में उच्च न्यायालय में कहा था कि आयोग केवल तथ्यान्वेषी प्राधिकरण है और उसके पास स्वामित्व या विवादों के प्रश्नों पर निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

उसके बाद आयोग ने अपना कामकाज बंद कर लिया।

एर्नाकुलम जिले के चेराई और मुनंबम गांवों के लोगों ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उनकी जमीन और संपत्तियों पर अवैध रूप से दावा कर रहा है, जबकि उनके पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान रसीदें हैं।

इस बीच, वन मंत्री ए के ससीन्द्रन ने बुधवार को कहा कि इस तरह के सभी हमले रिहायशी इलाकों में नहीं होते है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जंगल में घुसने वाले बाहरी लोगों को पहले से अनुमति लेनी चाहिए।

मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मानव-पशु संघर्ष पर की गई अपनी टिप्पणी का बचाव किया।

मंगलवार को जब एक विधायक ने वायनाड में हाथी के संदिग्ध हमले में एक आदिवासी व्यक्ति की मौत का मुद्दा उठाया तो ससीन्द्रन ने विधानसभा को कहा था कि यह घटना जंगल में गए लोगों के साथ घटी।

बुधवार को उन्होंने स्पष्ट किया, "चिंता इस बात पर होनी चाहिए कि लोग जंगलों के अंदर क्यों जा रहे हैं। मेरा यही मतलब था। आदिवासी समुदायों को छोड़कर हर किसी को जंगलों में प्रवेश करने के लिए वन्यजीव अधिकारियों की अनुमति की आवश्यकता होती है। मैं उन लोगों की बात कर रहा था जो बिना अनुमति के प्रवेश करते हैं।"

उन्होंने कहा कि हर कोई जंगली जानवरों के मानव बस्तियों में घुसने की शिकायत करता है।

उन्होंने कहा‘‘हालांकि, ये सभी हमले आबादी वाले इलाकों में नहीं होते हैं। लेकिन सरकार ऐसी तकनीकी बातों पर ध्यान नहीं देती और सभी को सहायता प्रदान करती है।’’

विपक्ष के नेता सतीशन ने ससीन्द्रन के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि मंत्री का यह दावा गलत है कि जंगली जानवरों के हमले जंगलों के अंदर होते हैं।

सतीशन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हाथियों के हालिया हमले बागानों और खेतों में हुए।’’

केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने बुधवार को राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते मानव-पशु संघर्ष को रोकने में कथित ‘निष्क्रियता’ के लिए केंद्र की कड़ी आलोचना की।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने आरोप लगाया कि वन्यजीवों के हमलों और मानव-पशु संघर्ष के बढ़ते खतरे के बावजूद केंद्र हस्तक्षेप करने में विफल रहा है।

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