नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर दिल्ली के शाहदरा इलाके में शुक्रवार सुबह एक घर में आग लगने से एक महिला और उसके 16 वर्षीय बेटे की मौत हो गई। हादसे में परिवार के चार अन्य सदस्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के एक अधिकारी ने बताया कि आग लगने की सूचना सुबह पांच बजकर 25 मिनट पर मिली, जिसके बाद दमकल के छह वाहनों को घटनास्थल पर भेजा गया।
अधिकारी ने बताया कि भोलानाथ नगर में चार मंजिला मकान की तीसरी तथा चौथी मंजिल पर आग लगी थी जिस पर करीब दो घंटे में काबू पा लिया गया।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘घर से शिल्पी गुप्ता (42) और उनके बेटे प्रणव गुप्ता के झुलसे हुए शव बरामद किए गए।’’
अधिकारी ने बताया कि हादसे में कैलाश गुप्ता (72), उनकी पत्नी भगवती गुप्ता (70), उनका बेटा मनीष गुप्ता (45) और मनीष का बेटा पार्थ (19) घायल हो गए जिनका जीटीबी अस्पताल में इलाज जारी है।
उन्होंने बताया कि अग्निशमन अभियान के दौरान बचाए गए दो भाई-बहनों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हादसे में जान गंवाने वालों में मनीष गुप्ता की पत्नी शिल्पी और बेटा प्रणव शामिल हैं। मनीष की हालत भी गंभीर है।
उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के दौरान दो भाई-बहनों को भी बचाया गया जिन्हें उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) प्रशांत गौतम ने बताया कि महिला और उसके बेटे की मौत दम घुटने के कारण हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘मौके पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। हमने भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 (ए) (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) और 106 (लापरवाही से मौत) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है और मामले की जांच शुरू कर दी है।’’
वहीं, बचाए गए दो बच्चों के पिता मनीष ने कहा, ‘‘दमकल की गाड़ियां देरी से पहुंचने के कारण दो लोगों की जान चली गई।’’
मनीष के पड़ोसी शोभित गुप्ता ने बताया कि भोलानाथ नगर की संकरी गलियों में खड़े वाहनों के कारण दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हुई।
उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘दमकल वाहन डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंचे। तब तक दोनों मंजिल पूरी तरह आग की चपेट में आ चुकी थीं।’’
आग लगने का कारण संभवत: शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पीड़ित परिवार ने आग बुझाने के कार्य में देरी के लिए संकरी गलियों और अव्यवस्थित पार्किंग को जिम्मेदार ठहराया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि त्रासदी दमकल गाड़ियों के देरी से पहुंचने की वजह से हुई।
इस संबंध में एक दमकल अधिकारी ने कहा कि डीएफएस को सुबह 5:24 बजे आग लगने की सूचना मिली और कुछ ही समय में दमकल गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि संकरी गलियों और वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग के कारण अग्निशमन अभियान शुरू करने में काफी देरी हुई।
पीड़ित परिवार के सदस्य हरिओम गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरे परिवार के सदस्यों की मृत्यु का प्रमुख कारण आग बुझाने के काम में देरी होना है।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि अग्निशमन गाड़ियां घर के बहुत नजदीक थीं, लेकिन वे संकरी गलियों में खड़े वाहनों के बीच से नहीं गुजर सकीं।
हरिओम ने कहा, ‘‘बड़ी दमकल गाड़ियों को वापस भेज दिया गया और छोटी गाड़ियों को घटनास्थल पर पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय लगा।’’
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