देश की खबरें | आदिवासी संगठन की नाकेबंदी कारण बंगाल, झारखंड के कुछ हिस्सों में ट्रेन सेवाएं प्रभावित
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जमशेदपुर/झाड़ग्राम, 11 फरवरी पारसनाथ पहाड़ियों पर अधिकार को लेकर एक आदिवासी संगठन की नाकेबंदी के कारण झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में शनिवार को ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) ने यह जानकारी दी।
‘आदिवासी सेंगेल अभियान’ (एएसए) ने असम, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सुबह से शाम तक रेल पटरियों को अवरुद्ध करने और सड़कों पर 'चक्का जाम' करने का आह्वान किया था।
एएसए कार्यकर्ताओं ने आद्रा मंडल के कांटाडीह स्टेशन, खड़गपुर मंडल के खेमासुली स्टेशन और चक्रधरपुर मंडल के महादेवसाल तथा पोसोइता स्टेशनों पर रेलवे पटरियों को अवरुद्ध कर दिया।
एसईआर ने एक बयान में बताया कि नाकेबंदी के कारण हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस, हावड़ा-टिटलागढ़ इस्पात एक्सप्रेस, खड़गपुर-टाटानगर पैसेंजर, टाटानगर-हावड़ा स्टील एक्सप्रेस, चक्रधरपुर-गोमोह मेमू, टाटानगर-दानापुर एक्सप्रेस और टाटानगर-आसनसोल पैसेंजर सहित कई रेलगाड़ियां रद्द कर दी गई।
बयान में कहा गया है, ‘‘खेमासुली से अपराह्न एक बजे, महादेवसाल से अपराह्न एक बजे और कांटाडीह से अपराह्न 3.55 बजे आंदोलन वापस ले लिया गया। धीरे-धीरे ट्रेन सेवाएं बहाल कर दी गईं।’’
एएसए अध्यक्ष सलखन मुर्मू ने कहा कि 11 फरवरी को तिलका मुर्मू की जयंती होती है। तिलका मुर्मू अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने वाले संताल समुदाय के पहले स्वतंत्रता सेनानी हैं।
एएसए ने 17 जनवरी को इन पांच राज्यों में पहाड़ियों पर अपना अधिकार जताने के लिए “मरंग बुरु बचाओ यात्रा” शुरू की। ये पहाड़ियां जैन समुदाय के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। आदिवासी पारसनाथ पहाड़ी को सबसे पवित्र ‘जेहरथन’ (पूजा स्थल) मानते हैं।
सलखन मुर्मू ने कहा कि “मरंग बुरु बचाओ यात्रा” 28 फरवरी को समाप्त होगी।
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