विदेश की खबरें | तोशाखाना मामला : इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने इमरान की दोषसिद्धि, तीन साल की सजा पर रोक लगाई

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस्लामाबाद, 29 अगस्त इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आम चुनाव से पहले बड़ी राहत देते हुए तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में उनकी दोषसिद्धि और तीन साल की जेल की सजा पर मंगलवार को रोक लगा दी।

अदालत ने इमरान को जेल से रिहा करने का आदेश भी दिया।

मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति तारिक महमूद जहांगीरी की खंड पीठ ने यह बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। खंड पीठ ने मामले में निचली अदालत के निर्णय को चुनौती देने वाली इमरान की याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) ने एक संक्षिप्त व्हॉट्सएप संदेश में बताया, “इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने जिला अदालत के फैसले पर रोक लगा दी है।”

उच्च न्यायालय ने कहा कि फैसले की प्रति जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।

न्यायमूर्ति फारूक ने कहा, “फैसले की प्रति जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। अभी हम सिर्फ यही कह रहे हैं कि (इमरान की) अर्जी मंजूर कर ली गई है।”

कानूनी मामलों में इमरान के सहयोगी नईम हैदर पंजोथा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “मुख्य न्यायाधीश ने हमारी अर्जी मंजूर कर ली है, सजा पर रोक लगा दी है और कहा है कि विस्तृत फैसला बाद में उपलब्ध कराया जाएगा।”

क्रिकेटर से नेता बने इमरान को 2018 से 2022 के बीच उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्हें और उनके परिवार को मिले राजकीय उपहारों को गैरकानूनी रूप से बेचने के आरोप में दोषी करार देते हुए तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

सत्र अदालत ने पीटीआई प्रमुख पर अगले पांच साल तक राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी थी, जिससे वे आगामी चुनाव नहीं लड़ सकते। इमरान ने निचली अदालत के फैसले को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने नेशनल असेंबली को समय से पूर्व दस अगस्त को भंग कर दिया था। नेशनल असेंबली को भंग किए जाने के 90 दिन के भीतर पाकिस्तान में आम चुनाव कराए जाने होते हैं।

हालांकि, आम चुनावों में देरी होने की संभावना है, क्योंकि सरकार ने घोषणा की है कि चुनाव नयी जनगणना के पूरा होने और नये निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय होने के बाद ही हो सकते हैं। दोनों प्रक्रिया में लगभग चार महीने का समय लग सकता है, जिससे आम चुनाव के अगले साल तक टलने की आशंका है।

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली इमरान की याचिका पर 22 अगस्त को सुनवाई की थी। पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता के बीमारी के कारण अदालत में उपस्थित होने में नाकाम रहने के कारण उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई स्थगित कर दी थी।

इमरान के वकील लतीफ खोसा ने बृहस्पतिवार को अपनी दलीलें पूरी करते हुए कहा था कि फैसला जल्दबाजी में दिया गया था और इसमें कई खामियां हैं। उन्होंने अदालत से सजा को रद्द करने की अपील की थी, लेकिन प्रतिवादियों ने अपनी दलीलें पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था।

इस बीच, उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल, न्यायमूर्ति मजहर अली अकबर नकवी और न्यायमूर्ति जमाल खान मंदोखाइल की तीन सदस्यीय पीठ भी तोशाखाना मामले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने बुधवार को तोशाखाना मामले के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कहा था कि सत्र अदालत के फैसले में ‘खामियां’ थीं।

पीठ ने कहा था कि फैसला जल्दबाजी में और आरोपी को बचाव का अधिकार दिए बिना दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने कहा था, “प्रथम दृष्टया, सत्र अदालत के फैसले में खामियां नजर आती हैं।”

उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि वह अपना फैसला सुनाने से पहले इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी होने का इंतजार करेगा। उसने बृहस्पतिवार को सुनवाई शुरू की थी, लेकिन यह बताए जाने पर बिना कोई तारीख तय किए इसे स्थगित कर दिया कि इस्लामाबाद उच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा है।

सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों ने 2022 में निर्वाचन आयोग में तोशाखाना मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इमरान ने सरकारी उपहारों की बिक्री से प्राप्त आय छिपाई थी।

निर्वाचन आयोग ने पहले इमरान को किसी भी पद के अयोग्य घोषित कर दिया था और फिर सत्र अदालत में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की थी। सत्र अदालत ने इमरान को दोषी करार देते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।

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