नयी दिल्ली, 30 नवंबर शादी ब्याह अब पारंपरिक रूप से संपन्न होने वाली रस्म नहीं रह गई है। आधुनिकता के इस दौर में युवा जोड़े जिंदगी के इस सबसे खूबसूरत लम्हें को किसी परिकथा सा रूप देना चाहते हैं ।
....और इसीलिए ‘डेस्टिनेशन वैडिंग’ लोकप्रिय हो रही हैं जहां जोड़े घर और शहर से दूर...दूसरे देश में या कई बार सात समंदर पार , हसीन वादियों, तारों भरी रात या अठखेलियां करती मखमली लहरों से सजे तट पर रेशम की डोरी से अपनी प्रेम कहानी बुनना चाहते हैं। डेस्टिनेशन वैडिंग में निश्चित रूप से लोग विविधतापूर्ण और लजीज भोजन एवं महंगे कपड़ों पर भी काफी धन खर्च करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में युगलों को भारत में ही डेस्टिनेशन वेडिंग की योजना बनाने के लिए प्रेरित किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश में 'डेस्टिनेशन वेडिंग' पर गंभीर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि भारत के लोग अगर विदेशों की जगह देश में ही शादियां करते हैं तो देश का पैसा देश में ही रहेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी। प्रधानमंत्री की चिंता के बाद देश भर में डेस्टिनेशन वेडिंग को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
डेस्टिनेशन वेडिंग की योजना बनाने वाले उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि घर से दूर शादी करने का चलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक हालांकि, ऐसे जोड़े अधिक हैं जो विदेशों की तुलना में देश के भीतर ही रोमांटिक और ऐतिहासिक परिदृश्य वाले स्थान की तलाश करते हैं।
वेडिंग प्लानर वेडिंगसूत्र डॉट कॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थिप त्यागराजन का कहना है कि 10 प्रतिशत धनी मानी लोग 'डेस्टिनेशन वेडिंग' का विकल्प चुनते हैं और इससे भी कुछ कम प्रतिशत लोग इस अवसर के लिए विदेश जाते हैं।
पार्थिप त्यागराजन ने पीटीआई- से कहा, ‘‘ राजस्थान, गोवा, महाबलीपुरम, केरल और मुंबई के अलावा दिल्ली के आसपास कुछ अन्य डेस्टिनेशन वेडिंग स्थलों में बड़ी संख्या में शादियां हो रही हैं। इसलिए, पैसे वाले 10 प्रतिशत लोग डेस्टिनेशन वेडिंग' कर रहे हैं और उनमें से केवल 10-15 प्रतिशत ही इसके लिए विदेश जा रहे हैं। ’’
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