देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष को हटाने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने डॉ. अनिल खुराना को बुधवार को यह कहते हुए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया कि उनकी नियुक्ति कानून के अनुसार नहीं थी।

नयी दिल्ली, 12 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने डॉ. अनिल खुराना को बुधवार को यह कहते हुए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया कि उनकी नियुक्ति कानून के अनुसार नहीं थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि मामले में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता का पूर्ण अभाव था।

डॉ. खुराना चार जुलाई 2025 को एनसीएच के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे।

शीर्ष अदालत ने कहा, “तीसरे प्रतिवादी की नियुक्ति रद्द की जाती है। तीसरा प्रतिवादी आयोग के अध्यक्ष पद से तुरंत इस्तीफा दे। तुरंत से हमारा मतलब है आज से एक सप्ताह के भीतर, ताकि वह अपने लंबित कार्यों को पूरा कर सके। हालांकि, इस अवधि में उसे कोई नीतिगत फैसला या वित्त से संबंधित निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी।”

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) अधिनियम, 2020 की धारा-4 का जिक्र करते हुए न्यायालय ने कहा कि इस प्रावधान के तहत उम्मीदवार के पास कम से कम 20 साल का अनुभव होना अनिवार्य है, जिसमें वह होम्योपैथी के क्षेत्र में “नेतृत्व की भूमिका” में भी रहा हो।

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशासन “अनिवार्य” पात्रता आवश्यकताओं में छूट नहीं दे सकता है।

पीठ ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि एनसीएच अधिनियम की धारा-4 के तहत निर्धारित अनिवार्य आवश्यकताओं और पद के लिए विज्ञापन की शर्तों की “पूरी तरह से अनदेखी” की गई, जिसके चलते न्यायालय के पास अध्यक्ष के चयन में हस्तक्षेप करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

उसने कहा, “आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए नयी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। हम आशा और विश्वास करते हैं कि चयन प्रक्रिया को कानून के अनुसार उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा।”

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉ. खुराना को अध्यक्ष के रूप में दी गई सेवा के आधार पर भविष्य में कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए।

उसने कहा, “जरूरी अनुभव न होने के बावजूद तीसरे प्रतिवादी को अध्यक्ष नियुक्त करने का कार्य कानूनी दुर्भावना से ग्रस्त है... हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब भी किसी सार्वजनिक कार्यालय में नियुक्ति की जाती है, तो कार्यालय की प्रकृति की परवाह किए बिना, अनिवार्य पात्रता मानदंड निर्धारित करने वाले नियमों पर सख्ती से अमल किया जाना चाहिए; आखिरकार, संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत किसी भी सार्वजनिक पद पर उचित, निष्पक्ष और गैर-मनमाने तरीके से नियुक्ति की जानी चाहिए। इस कसौटी पर परखे जाने पर तीसरे प्रतिवादी की नियुक्ति स्वीकार्य नहीं पाई जाती है।”

यह आदेश डॉ. अमरगौड़ा एल पाटिल की ओर से दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने डॉ. खुराना की नियुक्ति को बरकरार रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।

पद के लिए आवेदक डॉ. पाटिल ने डॉ. खुराना की नियुक्ति को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उनके पास राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 की धारा-4(2) और 19 के तहत अपेक्षित अनुभव नहीं है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें