महिलाओं के सम्मेलन में इस तरह की स्थिति पर सभागार में उपस्थित कुछ पुरुषों और सैकड़ों महिलाओं को असहज होते देखा गया।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रमुख और अंतिम पुरुष वक्ता एचिम स्टीनर ने मंच पर आकर कहा, ‘‘मैं इस बात से पूरी तरह वाकिफ हूं कि मैं इस मंच से आपको संबोधित करने वाला एक और पुरुष वक्ता हूं।’’
उन्होंने कहा कि उनके पास दो विकल्प थे, ‘‘या तो बोलूं ही नहीं या मंच पर आ जाऊं और लैंगिक समानता का समर्थन करूं।’’
संयुक्त राष्ट्र के लिए क्रोएिशया के राजदूत इवान सिमोनोविक इस मंच पर संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद का प्रतिनिधित्व करने वाले तीसरे पुरुष वक्ता थे।
उन्होंने परिषद की महिला अध्यक्ष के निजी कारणों से कार्यक्रम में नहीं आ पाने पर खेद प्रकट किया।
समारोह को संबोधित करने वाली पहली महिला वक्ता चेतना गाला सिन्हा का नंबर छठे स्थान पर आया। चेतना के मंच पर पहुंचने पर उनका जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया गया।
चेतना ने तीन दशक पहले मुंबई से महाराष्ट्र के एक सूखा प्रभावित गांव में जाकर एक बैंक शुरू करने में स्थानीय महिलाओं की मदद की।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी महिलाएं सूक्ष्म ऋण से सूक्ष्म उद्यम तक पहुंचना चाहती हैं। महिलाओं के लिए निवेश करने के लिहाज से इससे बेहतर समय नहीं हो सकता।’’
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