देश की खबरें | मुख्यमंत्री के खिलाफ स्वप्ना सुरेश के ‘खुलासे’ से राजनीतिक हंगामा मचा, माकपा ने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सोना तस्करी मामले की जांच कर रहे सीमा शुल्क विभाग ने शुक्रवार को दावा किया कि सोना तस्करी मामले की मुख्य अभियुक्त स्वप्ना सुरेश ने मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, विधानसभा के अध्यक्ष पी. श्रीरामकृष्णन और कुछ मंत्रियों के खिलाफ डॉलर ‘तस्करी’ मामले में ‘‘सनसनीखेज खुलासे’’ किए हैं, जिसके बाद केरल में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है।

कोच्चि, पांच मार्च सोना तस्करी मामले की जांच कर रहे सीमा शुल्क विभाग ने शुक्रवार को दावा किया कि सोना तस्करी मामले की मुख्य अभियुक्त स्वप्ना सुरेश ने मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, विधानसभा के अध्यक्ष पी. श्रीरामकृष्णन और कुछ मंत्रियों के खिलाफ डॉलर ‘तस्करी’ मामले में ‘‘सनसनीखेज खुलासे’’ किए हैं, जिसके बाद केरल में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है।

राज्य में विधानसभा चुनावों से कुछ हफ्ते पहले केरल उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर सीमा शुल्क विभाग ने कहा कि सुरेश ने एजेंसी को सीआरपीसी की धारा 108 और 164 के तहत दिए गए बयान में ये ‘‘खुलासे’’ किए।

इस अवसर को भुनाते हुए विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने चुनाव प्रचारों में इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

बहरहाल, सत्तारूढ़ माकपा ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए चुनावों के परिप्रेक्ष्य में इसकी मंशा पर ही सवाल उठा दिए।

सीमा शुल्क आयुक्त सुमित कुमार की तरफ से दायर हलफनामे में दावा किया गया, ‘‘यह बताया जाता है कि धारा 108 और धारा 164 के तहत दिए गए बयान में सुरेश ने माननीय मुख्यमंत्री, केरल विधानसभा के माननीय अध्यक्ष और राज्य कैबिनेट के कुछ माननीय मंत्रियों के खिलाफ स्तब्धकारी खुलासे किए हैं।’’

इसमें बताया गया कि सुरेश ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के संयुक्त अरब अमीरात के पूर्व महावाणिज्य दूत के साथ निकट संबंध थे और बयान दिया कि अवैध रूप से धन की लेन-देन हुई।

हलफनामे में दावा किया गया, ‘‘उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि महावाणिज्य दूतावास की मदद से माननीय मुख्यमंत्री और माननीय विधानसभा अध्यक्ष के इशारे पर विदेशी मुद्रा की तस्करी हुई।’’

डॉलर मामला तिरूवनंतपुरम में यूएई वाणिज्य दूतावास के पूर्व वित्त प्रमुख द्वारा ओमान के मस्कट में 1,90,000 डॉलर (करीब 1.30 करोड़ रुपये) की कथित तौर पर तस्करी से जुड़ा हुआ है।

सोना तस्करी मामले में आरेापी सुरेश और सह-आरोपी सरित पी. एस., डॉलर मामले में भी कथित तौर पर संलिप्त हैं और सीमा शुल्क विभाग उन्हें गिरफ्तार कर चुका है।

हलफनामा में बताया गया कि सीमा शुल्क विभाग को दिए बयान में सुरेश ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके प्रधान सचिव तथा एक निजी कर्मचारी के साथ उसके निकट संबंध थे।

विजयन पर प्रहार करते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि खुलासों को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री के पद पर रहने का अधिकार नहीं है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जांच एजेंसियों ने अभी तक मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने आरोप लगाए कि मजिस्ट्रेट के समक्ष सुरेश के खुलासे के बावजूद राज्य सरकार और केंद्र सरकारों ने मामले में विस्तृत जांच नहीं करवाई।

चेन्नीथला ने कहा, ‘‘इस स्तब्ध कर देने वाले खुलासे के बावजूद एजेंसियों ने जांच बंद कर दी है। जांच बंद करने के आदेश किसने दिए? जांच तब बंद किए गए, जब यह निश्चित था कि जांच मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा। यह मुख्यमंत्री और भाजपा द्वारा षड्यंत्र का हिस्सा लगता है।’’

उन्होंने कहा कि यह राज्य और केंद्र सरकारों का षड्यंत्र है।

भाजपा नेता सुरेंद्रन ने कहा कि विजयन, श्रीरामकृष्णन और मंत्रियों के खिलाफ खुलासे ‘‘काफी गंभीर’’ हैं और इससे चुनावों के समय सरकार गंभीर संकट में फंस गई है।

उन्होंने कोल्लम जिले के कुंदारा में कहा, ‘‘यह निश्चित है कि विजयन और मामले से जुड़े लोग जेल जाएंगे।’’

वहीं हलफनामा दाखिल करने वाले सीमा शुल्क आयुक्तालय पर प्रहार करते हुए सत्तारूढ़ माकपा ने आरोप लगाए कि जांच एजेंसियां इतना नीचे गिर गई हैं कि वे भाजपा के हाथों की कठपुतली भर बन कर रह गई हैं।

माकपा नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वाम मोर्चे की सरकार के खिलाफ खेले जा रहे ‘‘राजनीतिक खेल’’ के विरोध में वह प्रदर्शन करेगी।

माकपा ने आरोप लगाए कि उच्च न्यायालय में सीमा शुल्क विभाग द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा यह प्रदर्शित करता है कि भाजपा यह जानकार निराश है कि चुनाव के बाद राज्य में वामपंथी दल सत्ता में बने रहेंगे।

माकपा ने बयान जारी कर कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन और वामपंथी सरकार की छवि केरल के समाज में सुशासन की है। इससे केंद्र की सरकार निराश है और वामपंथियों के खिलाफ वह किसी भी हद तक जा सकती है। जांच एजेंसियां इतना गिर गई हैं कि वे भाजपा के हाथों की चुनावी कठपुतली हो गई हैं। यह मत सोचिए कि लोग मूर्ख हैं।’’

इसने कहा कि आरोपी द्वारा एक महीने पहले दिए गए ‘गोपनीय बयान’ को चुनावों की घोषणा के बाद सीमा शुल्क विभाग द्वारा बताए जाने से केंद्र सरकार की मंशा साफ तौर पर जाहिर होती है।

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