देश की खबरें | राज्य सरकार जनता के हितों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गयी है-दीपक प्रकाश

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रांची, 20 जून झारखंड भाजपा के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद दीपक प्रकाश ने शनिवार आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने कोल ब्लॉक नीलामी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राज्य की जनता के हितों के खिलाफ कार्य किया है।

प्रकाश ने शनिवार को राज्य सरकार के कोल ब्लॉक नीलामी के केन्द्र के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के निर्णय की तीखी आलोचना की और कहा कि यह कार्य सर्वथा राज्य की जनता के हितों के खिलाफ है।

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कोरोना काल में जहां धन की कमी का रोना रोती रही है जबकि केन्द्र सरकार ने कोल ब्लॉक नीलामी के माध्यम से लोगों के रोजगार एवं व्यापार में वृद्धि तथा देश की समृद्धि का रास्ता खोलना चाहा तो राज्य सरकार उसका विरोध कर रही है।

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब केन्द्र सरकार के कोल ब्लॉक नीलामी के फैसले का राज्य सरकार ने स्वागत किया था तो ऐसा क्या हो गया कि चंद दिनों के भीतर ही अब वह केन्द्र के इस फैसले का विरोध कर रही है।

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उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से राज्य में देश भर से लौटे अप्रवासी श्रमिकों को बड़ी संख्या में रोजगार मिल सकेगा। दूसरा, राज्य में वाणिज्यिक गतिविधि बढ़ने से राज्य और यहां के लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ होंगे।

उन्होंने कहा कि नये क्षेत्रों में कोयला खनन से राज्य को और अधिक रॉयल्टी मिलेगी जिससे यहां आधारभूत संरचना के विकास में भारी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं इससे विभिन्न जिलों को मिलने वाले डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड में बढ़ोत्तरी होगी जिससे वहां बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो

सकेंगे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बताया था कि कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर राज्य सरकार ने माननीय उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल की है। उनका कहना था कि कोल ब्लॉक नीलामी में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को विश्वास में लेने की जरूरत थी क्योंकि झारखण्ड में खनन का विषय हमेशा से ज्वलंत रहा है। इतने वर्ष बाद नई प्रक्रिया अपनाई गई है और इस प्रक्रिया

से प्रतीत होता है कि फिर पुरानी व्यवस्था में हम जाएंगे, जिससे हम बाहर आए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था से यहां रह रहे लोगों को खनन कार्य में अभी भी अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है। विस्थापन की समस्या उलझी हुई है। केंद्र सरकार को मामले में जल्दीबाजी नहीं करने का आग्रह राज्य सरकार पूर्व में कर चुकी थी। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ, जिससे लगे कि पारदर्शिता बरती जा रही है।

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