देश की खबरें | जातिगत गणना के फैसले से ‘जल्द’ जनगणना कराए जाने के संकेत: सरकारी पदाधिकारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्र द्वारा बुधवार को जातिगत गणना कराने की घोषणा किए जाने के साथ ही संभावना बढ़ गई है कि सरकार ‘‘जल्द ही’’ जनगणना करा सकती है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही।

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल केंद्र द्वारा बुधवार को जातिगत गणना कराने की घोषणा किए जाने के साथ ही संभावना बढ़ गई है कि सरकार ‘‘जल्द ही’’ जनगणना करा सकती है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही।

उन्होंने बताया कि हर 10 साल पर होने वाली जनगणना कोविड महामारी के बाद किसी न किसी कारण से टलती रही है।

सरकार द्वारा दशकीय जनगणना के साथ-साथ जातिगत गणना कराने का निर्णय लिए जाने के बाद अब ध्यान इस बात पर है कि यह कार्य कब किया जाएगा, क्योंकि इसमें पहले ही पांच वर्ष का विलंब हो चुका है।

मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जनगणना जल्द ही की जाएगी, क्योंकि जातिगत गणना कराने या न कराने के निर्णय के कारण पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है।

जनगणना का कार्य भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त की प्रत्यक्ष देखरेख में किया जाएगा, जो गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करने वाले अधिकारी हैं।

गृह मंत्रालय इस बात पर चुप्पी साधे हुए है कि यह वृहद गणना कब की जाएगी।

जनगणना के तहत मकान सूचीकरण चरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अद्यतन करने का कार्य एक अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक पूरे देश में किया जाना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

जनगणना कार्य अभी भी रुका हुआ है और सरकार ने अभी तक नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में कहा था कि जनगणना उचित समय पर की जाएगी और जब इस पर निर्णय हो जाएगा तो इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की 24 दिसंबर, 2019 को हुई बैठक में 8,754.23 करोड़ रुपये की लागत से भारत की 2021 की जनगणना कराने और 3,941.35 करोड़ रुपये की लागत से एनपीआर को अद्यतन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।

हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में जनगणना के लिए सिर्फ 574.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि काफी देरी के बाद भी इस साल यह कार्य नहीं हो पाएगा।

लेकिन, सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह (बजट) एक छोटा मुद्दा है और इसे बिना किसी बाधा के सुलझाया जा सकता है।

संपूर्ण जनगणना और एनपीआर प्रक्रिया पर सरकार को 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आने का अनुमान है।

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