देश की खबरें | शिंदे को शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने को लेकर इस्तीफा दे देना चाहिए : विपक्ष

मुंबई, 27 अगस्त महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में अनावरण के करीब नौ महीने बाद छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के गिरने को लेकर आलोचनाओं से घिरी महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मंगलवार को कहा कि प्रतिमा का निर्माण नौसेना ने किया था, जबकि विपक्ष ने राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन पर निशाना साधा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के इस्तीफे की मांग की।

सिंधुदुर्ग जिले में शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने का मामला विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े विवाद का रूप लेने की आशंका के बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने अब उसी स्थान पर 17वीं सदी के मराठा योद्धा राजा की एक बड़ी प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय किया है।

सिंधुदुर्ग से ताल्लुक रखने वाले महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर ने उसी स्थान पर शिवाजी महाराज की 100 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

मुंबई से लगभग 480 किलोमीटर दूर इस तटीय जिले के मालवन तहसील के राजकोट किले लगी प्रतिमा 35 फुट ऊंची थी, जो सोमवार को गिर गयी।

आक्रोश के बाद, सिंधुदुर्ग पुलिस ने प्रतिमा गिरने की घटना को लेकर परियोजना में शामिल ठेकेदार जयदीप आप्टे और स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट चेतन पाटिल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया। फडणवीस ने कहा कि जांच पहले ही की जा रही है।

नौसेना ने कहा कि उसने नौसेना दिवस पर सिंधुदुर्ग के नागरिकों को समर्पित एक कार्यक्रम के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज की अनावरण की गई प्रतिमा को हुए नुकसान पर "गहरी चिंता" के साथ संज्ञान लिया है।

नयी दिल्ली में नौसेना के प्रवक्ता द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, "राज्य सरकार और संबंधित विशेषज्ञों के साथ, नौसेना ने इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के कारण की तत्काल जांच करने और प्रतिमा की मरम्मत और उसे यथाशीघ्र पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से कदम उठाने के लिये एक टीम तैनात की है।"

राजकोट किले में पिछले साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मराठा शासक की 35 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था, जो तेज हवाओं के बीच सोमवार की दोपहर गिर गई।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस घटना ने राज्य सरकार को अजीब स्थिति में डाल दिया है और उसे विपक्षी दलों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने प्रतिमा के निर्माण में घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि औरंगजेब और मुगलों ने भी शिवाजी महाराज का इस तरह अपमान नहीं किया था।

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए, हम मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री रवींद्र चव्हाण से विभाग वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने शिवाजी महाराज को भी नहीं बख्शा और भ्रष्टाचार में लिप्त हुए।’’

उन्होंने कहा कि प्रतिमा बनाने का ठेका मुख्यमंत्री के करीबी लोगों को दिया गया। राउत ने इसे एक गंभीर मामला बताया।

मुख्यमंत्री शिंदे के इस बयान का जिक्र करते हुए कि 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के कारण प्रतिमा गिरी, राउत ने कहा कि तटीय क्षेत्रों पर हवा तेज ही चलती है।

राउत ने कहा कि समाज सुधारक लोकमान्य तिलक की प्रतिमा मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर 1933 में स्थापित की गई थी, लेकिन यह अब भी खड़ी है। उन्होंने कहा कि 1956 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सतारा जिले में प्रतापगढ़ किले में शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की थी और वह अब भी उसी स्थिति में है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने इस घटना को एक गंभीर मुद्दा करार दिया और कहा कि सरकार ने प्रतिमा स्थापित करते समय आवश्यक सावधानी नहीं बरती।

पाटिल ने कहा, "इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने केवल प्रधानमंत्री के हाथों अनावरण के उद्देश्य से एक कार्यक्रम आयोजित किया।"

विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मुद्दे पर सरकार का बचाव करने की कोशिश की। फडणवीस ने कहा, "प्रतिमा के निर्माण की देखरेख राज्य सरकार ने नहीं बल्कि नौसेना ने की थी। प्रतिमा के निर्माण और स्थापना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों ने स्थानीय महत्वपूर्ण कारकों जैसे हवा की तेज गति और इस्तेमाल किए गए लोहे की गुणवत्ता को नजरअंदाज किया होगा। समुद्री हवाओं के संपर्क में आने के कारण प्रतिमा में जंग लगने की संभावना अधिक हो सकती है।"

भाजपा के वरिष्ठ नेता फडणवीस ने सवाल किया कि अब सवाल यह है कि प्रतिमा के निर्माताओं ने इसे स्थापित करने से पहले इन सभी कारकों को समझा था या नहीं।

महराष्ट्र पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा लिखा गया एक पत्र सामने आया है जिसमें अधिकारियों ने प्रतिमा पर "जंग" लगने और इसके "खराब" दिखने का उल्लेख किया था। सिंधुदुर्ग जिले में प्रतिमा के गिरने से छह दिन पहले नौसेना के एक अधिकारी को भेजे गए पत्र में स्थायी उपाय सुझाए गए थे।

पीडब्ल्यूडी के पत्र की एक प्रति ‘पीटीआई’ के पास है, जिसमें खुलासा हुआ है कि विभाग के एक सहायक अभियंता ने नौसेना के एक अधिकारी को प्रतिमा के कुछ हिस्सों में जंग लगने और उसके ‘‘खराब’’ दिखने के बारे में लिखा था।

यह पत्र 20 अगस्त को मालवन तहसील में पीडब्ल्यूडी कार्यालय से जुड़े एक सहायक अभियंता द्वारा क्षेत्रीय तटीय सुरक्षा अधिकारी और क्षेत्रीय नागरिक-सैन्य संपर्क अधिकारी कमांडर अभिषेक करभारी को संबोधित करते हुए भेजा गया था।

पीडब्ल्यूडी इंजीनियर ने पत्र में कहा था, "आपने राजकोट किले में शिवाजी महाराज की एक मूर्ति स्थापित की है। मूर्ति के कलाकार जयदीप आप्टे ने जून में कुछ मरम्मत कार्य किए थे। समुद्री हवाओं और बारिश के कारण प्रतिमा में इस्तेमाल किए गए नट और बोल्ट जंग खा गए हैं। पूरी प्रतिमा अब खराब दिख रही है।"

पीडब्ल्यूडी इंजीनियर ने लिखा कि साल भर किले को देखने आने वाले पर्यटक, स्थानीय निवासी और जनप्रतिनिधि प्रतिमा की स्थिति को लेकर निराशा व्यक्त करते हैं।

फडणवीस ने कहा, "हमारा संकल्प है कि उसी स्थान पर छत्रपति शिवाजी महाराज की एक बड़ी प्रतिमा बनाई जाए।"

इस घटना को लेकर विपक्ष द्वारा राज्य सरकार पर निशाना साधे जाने के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा, "प्रतिमा का गिरना दुखद है, लेकिन विपक्षी दलों का इस पर रुख अप्रिय है। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इसे उथला माना जाएगा।"

मुख्यमंत्री शिंदे ने सोमवार को दावा किया कि यह घटना 45 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवा के कारण हुई।

मंत्री केसरकर ने कहा कि इस घटना से कुछ अच्छा निकल सकता है और उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर राजनीति से बचना चाहिए।

संबंधित घटनाक्रम में, इस घटना से नाराज शिवसेना (यूबीटी) विधायक वैभव नाइक ने सोमवार शाम को मालवन में पीडब्ल्यूडी कार्यालय में तोड़फोड़ की। पुलिस ने मंगलवार को नाइक और उनके समर्थकों के खिलाफ पीडब्ल्यूडी कार्यालय में तोड़फोड़ करने के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज की।

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