पुलिस को जांच पूरी करने के लिये समय देने के खिलाफ शरजील की हाईकोर्ट में याचिका

इस याचिका के 14 मई को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।

जमात

नयी दिल्ली, 11 मई जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जांच पूरी करने के लिये पुलिस को और समय दिया था।

इस याचिका के 14 मई को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।

इमाम ने निचली अदालत के 25 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत दिल्ली पुलिस को गैर कानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिये 90 दिन की तय सीमा से अतिरिक्त समय की इजाजत दी गई थी।

उसने अदालत से इस मामले में निर्धारित 90 दिन की समय सीमा के अंदर जांच नहीं पूरी होने पर जमानत दिये जाने का भी अनुरोध किया। निचली अदालत ने हाल में उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ दिसंबर में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास के हिंसक प्रदर्शन के सिलसिले में इमाम को 28 जनवरी को गिफ्तार किया गया था। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद जांच पूरी करने के लिये निर्धारित 90 दिन की मियाद 27 अप्रैल को खत्म हो गई थी।

उसे बिहार के जहानाबाद जिले से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने जब जांच पूरी करने के लिए और वक्त के लिये आवेदन किया तो उसने मांग की कि उसे जमानत दी जाए क्योंकि जांच 90 दिन के तय समय में जांच पूरी नहीं हुई है। उसने कहा कि उसे पुलिस के अतिरिक्त समय मांगे जाने के बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी गई, जैसा कि कानून के तहत जरूरी है।

निचली अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि जांच की अवधि बढ़ाए जाने का आदेश 90 दिन की निर्धारित समयसीमा के खत्म होने से पहले दिया गया था।

निचली अदालत के न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा था, “गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम की धारा 43 डी (2) के तहत जांच खत्म करने का समय क्योंकि पहले ही बढ़ा दिया गया है, इसलिये मेरी राय है कि आरोपी को वैधानिक जमानत पर छोड़ने की याचिका में कोई दम नहीं है, और उसी के अनुरूप इसे खारिज किया जाता है।”

कानून की उपरोक्त धारा के तहत संतुष्ट होने पर अदालत आरोपी की हिरासत को 180 दिनों तक बढ़ा सकती है।

इमाम ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा कि उसे आगे की हिरासत के लिये हर 15 दिन पर अदालत में पेश भी नहीं किया गया जैसा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सआरपीसी) में अनिवार्य है।

याचिका में कहा गया कि जांच एजेंसी ने अपने 25 अप्रैल के आवेदन में सिर्फ जांच का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था और उसमें न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने की मांग नहीं थी, इसलिये वह जमानत का हकदार है।

इमाम अभी असम पुलिस द्वारा यूएपीए के तहत दर्ज मामले में गुवाहाटी जेल में बंद है।

पुलिस ने निचली अदालत से कहा था कि कोविड-19 महामारी की वजह से जारी बंद के कारण जांच की प्रगति प्रभावित हुई है।

इमाम कथित तौर पर शाहीन बाग में प्रदर्शन के आयोजन में शामिल था लेकिन वह सुर्खियों में तब आया जब एक वीडियो में वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लोगों के एक समूह के सामने विवादित टिप्पणी करता दिखा। इसके बाद उसके खिलाफ राजद्रोह की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। उसके खिलाफ असम में भी मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी उसकी उस कथित टिप्पणी के लिये मामला दर्ज किया था जिसमें उसने असम और पूर्वोत्तर को देश के अन्य हिस्से से “अलग” करने की धमकी दी थी।

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