जयपुर, चार फरवरी फिल्म निर्माता इम्तियाज अली का कहना है कि जो फिल्में उन्होंने बनाई वे उन्हें किराये के मकान जैसी लगती हैं लेकिन जिन फिल्मों को देखते हुए वह बड़े हुए, वे उन्हें अपने दिल के करीब ज्यादा दिखती हैं। इसी वजह से वह अपनी ‘रॉकस्टार’ या ‘तमाशा’ के बजाय ‘शोले’ को अधिक पसंद करते हैं।
अली की फिल्मों का अपना एक प्रशंसक वर्ग है, विशेष तौर पर ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ का। ये फिल्में रिलीज के समय भले ही अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकीं लेकिन समय बीतने के साथ उनके प्रशंसकों के लिए ये फिल्में इतनी खास हो गईं कि वे इनकी किसी भी तरह की आलोचना नहीं सुन सकते।
अली ने यहां सोमवार को जयपुर साहित्योत्सव में कहा, ‘‘बतौर फिल्म निर्माता, ऐसा होता है कि आप फिल्म बनाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। मेरे लिए ‘तमाशा’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाईवे’ या ऐसी और फिल्में महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि वे फिल्में खास मायने रखती हैं जिन्हें मैंने उस समय देखा, जब मैं फिल्म निर्माता नहीं था।’’
उन्होंने कहा,‘‘ इसलिए यदि कोई ‘शोले’ के बारे में कुछ गलत बोले तो मैं भिड़ जाउंगा। रमेश सिप्पी (निर्देशक) को ये बात पता नहीं होगी। मैंने धर्मेंन्द्र को एक सीन के बारे में बताया, उन्हें वह याद ही नहीं था। उन्हें केवल दिलीप कुमार (की फिल्मों के) के सीन याद थे। तो जो फिल्म आप देखते हैं, वह आपकी होती है। अपनी बनाई फिल्में तो किराये के घर की तरह होती हैं जिनमें आप केवल रहते हैं।’’
फिल्म आलोचक अनुपमा चोपड़ा के साथ एक सत्र में इम्तियाज अली ने ये बातें कहीं।
अली ने कहा कि उनसे अक्सर कहा जाता है कि उनकी फिल्में समय से आगे हैं, लेकिन ये कुछ ऐसी बात है जिसे वह बदलना चाहेंगे।
उन्होंने बताया, ‘‘अभी लिफ्ट में एक लड़की थी और उसने कहा, “सर, क्या आपको लगता है कि आप अपने समय से आगे हैं? लेकिन मैं ऐसा न होने की बहुत कोशिश कर रहा हूं। लड़की ने कहा कि आपकी फिल्म रिलीज के पहले दिन बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करती और फिर बाद में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो मैंने कहा कि इसे बदलने के लिए काम कर रहा हूं। मैं सभी संभव तरकीबें सीखने की कोशिश कर रहा हूं।’’
अली ने नेटफ्लिक्स के लिए ‘अमर सिंह चमकीला’ बनाई थी जिसे समीक्षकों द्वारा काफी सराहा गया।
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