ताजा खबरें | घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए रेरा और दिवाला संहिता के प्रावधान पर्याप्त

नयी दिल्ली, 28 जुलाई केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए रेरा कानून और दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के प्रावधान पर्याप्त हैं और फिलहाल किसी नए केंद्रीय कानून की कोई योजना नहीं है।

आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि फ्लैट खरीदारों और प्रमोटरों के बीच अनुबंध संबंधी शर्तों को नियंत्रित करने के लिए संसद में 2016 में रेरा अधिनियम पारित किया गया।

उन्होंने बताया कि अब तक करीब 1.5 लाख रियल एस्टेट परियोजनाएं रेरा अधिनियत के तहत पंजीकृत हैं, जबकि 2016 से 2024 तक केवल 517 रियल एस्टेट कंपनियों में दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि रेरा और आईबीसी कानूनों के प्रावधान फिलहाल पर्याप्त हैं, और किसी नए केंद्रीय कानून की आवश्यकता या योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि रेरा अधिनियम लागू होने से पहले रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कोई केंद्रीय नियामक ढांचा नहीं था। उनके अनुसार, रेरा अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, जिससे घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा सके।

उन्होंने बताया कि रेरा अधिनियम के तहत सभी अपूर्ण तथा चालू परियोजनाओं और नई परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है एवं प्रमोटर को हर तिमाही प्रगति रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होती है।

उन्होंने बताया कि मार्च 2023 में अमिताभ कांत की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी तथा अगस्त 2023 में प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय अक्षमता अधूरी परियोजनाओं की मुख्य वजह है। समिति ने परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए।

उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर, उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अटकी परियोजनाओं के खरीदारों को राहत देने के लिए नीति बनाई है।

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