ताजा खबरें | संसदीय समिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री स्थापित करने की सिफारिश की
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नयी दिल्ली, चार अगस्त संसद की एक समिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री स्थापित करने की सिफारिश की है ताकि आंकड़ों पर आधारित और साक्ष्य आधारित नीति तैयार करने में मदद मिल सके।
समिति ने तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने का भी सुझाव दिया है, जिसमें कहा गया है कि उनके बाजार मूल्य में वृद्धि से वे कम किफायती हो जाएंगे।
समिति ने कहा कि इससे खपत कम होगी और कैंसर सहित तंबाकू से संबंधित बीमारियों का खतरा कम होगा।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर विभाग से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी 147वीं रिपोर्ट में कहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय को तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने के फैसले में तेजी लाने के लिए राजस्व विभाग के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
इस रिपोर्ट को शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया।
इसमें कहा गया है कि कैंसर के उपचार पर बेहतर नीति तैयार करने और कैंसर देखभाल के समान वितरण के लिए, देश भर में कैंसर की घटनाओं और प्रकार के बारे में यथार्थवादी जानकारी रखने की तत्काल आवश्यकता है।
समिति ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय को राज्य सरकारों को 'कैंसर एटलस' तैयार करने में भाग लेने के लिए राजी करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि पूरी भारतीय आबादी जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) के तहत कवर की जा सके जिससे डेटा व साक्ष्य आधारित नीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
इसने सुझाव दिया कि कैंसर से संबंधित बीमारियों पर वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त करने के लिए कैंसर रोगियों के डेटा को रिकॉर्ड करने के लिए पीबीसीआर को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जोड़ा जा सकता है।
समिति ने इस बात पर गौर किया है कि वर्तमान में पीबीसीआर केवल 16 प्रतिशत भारतीय आबादी को कवर करते हैं। इसलिए, यह बहुत आवश्यक है कि राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम भारत की आबादी को बड़े पैमाने पर कवर करे, ताकि कैंसर की महामारी विज्ञान की वैज्ञानिक समझ के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस हो।
कैंसर के लिए एक मजबूत स्क्रीनिंग तंत्र पर जोर देते हुए, समिति ने सुझाव दिया कि कैंसर स्क्रीनिंग के लिए महीने में एक दिन तय किया जा सकता है।
कैंसर देखभाल और प्रबंधन के लिए संस्थागत ढांचे और कैंसर से निपटने के लिए वित्तीय सहायता पर सरकार के प्रोत्साहन की सराहना करते हुए, समिति ने कहा कि कैंसर को अन्य जीवनशैली और गैर-संचारी रोगों का हिस्सा बनने के बजाय अलग से निपटा जाना चाहिए।
समिति ने राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीसीपी) को राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और आघात रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) से अलग करने की सिफारिश की ताकि कैंसर की जांच, शीघ्र निदान और प्रबंधन पर बेहतर ध्यान दिया जा सके।
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