देश की खबरें | भारत में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष 20 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है: बीएमजे अध्ययन

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नयी दिल्ली, 30 नवंबर सभी स्रोतों से बाहरी वायु प्रदूषण के कारण भारत में प्रतिवर्ष 21 लाख 80 हजार लोगों की मौत होती है। ‘द बीएमजे’ में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

इस मामले में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।

शोध में पाया गया कि उद्योग, बिजली उत्पादन और परिवहन में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण दुनियाभर में प्रतिवर्ष 51 लाख अतिरिक्त लोगों की मौत होती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह 2019 में सभी स्रोतों से बाहरी वायु प्रदूषण के कारण दुनियाभर में कुल अनुमानित 83 लाख मौतों के 61 प्रतिशत के बराबर है और इन मौतों को स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करके रोका जा सकता है।

जर्मनी के ‘मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री’ के शोधकर्ताओं सहित टीम ने जीवाश्म ईंधन से संबंधित वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने और जीवाश्म ईंधन को स्वच्छ ऊर्जा के रूप में बदलने संबंधी नीतियों से संभावित स्वास्थ्य लाभों का आकलन करने के लिए एक नए मॉडल का इस्तेमाल किया।

शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों का आकलन चार परिदृश्यों में किया गया। पहले परिदृश्य में पाया गया कि जीवाश्म ईंधन से संबंधित सभी उत्सर्जन स्रोत चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो गए हैं। दूसरे और तीसरे परिदृश्य में यह माना गया है कि जीवाश्म चरण समाप्त होने की दिशा में 25 प्रतिशत और 50 प्रतिशत जोखिम में कमी दर्ज की गई है। चौथा परिदृश्य में वायु प्रदूषण के सभी मानव-प्रेरित (मानवजनित) स्रोतों को हटा दिया जाता है।

परिणामों से पता चलता है कि 2019 में, दुनियाभर में 83 लाख मौतें परिवेशी वायु में सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) और ओजोन (ओ3) के कारण हुईं, जिनमें से 61 प्रतिशत (51 लाख) जीवाश्म ईंधन से जुड़ी थीं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह वायु प्रदूषण से होने वाली अधिकतम मौतों का 82 प्रतिशत है, जिसे सभी मानवजनित उत्सर्जन को नियंत्रित करके रोका जा सकता है।

उन्होंने कहा कि परिवेशीय वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों के कारण होने वाली मौतें पूरे दक्षिण और पूर्वी एशिया में सबसे अधिक थीं, विशेष रूप से चीन में प्रतिवर्ष 24.40 लाख और इसके बाद भारत में 21.80 लाख प्रति वर्ष थीं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर (52 प्रतिशत) मौतें, हृदय रोग (30 प्रतिशत), स्ट्रोक (16 प्रतिशत), फेफड़े की बीमारी (16 प्रतिशत) और मधुमेह (6 प्रतिशत) से संबंधित थीं।

नई दिल्ली स्थित ‘कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन, उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स’ के डॉ. शुचिन बजाज ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर जन स्वास्थ्य चिंता के रूप में सामने आया है, जो समय से पहले होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बनता है।

शोध में शामिल बजाज ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के व्यापक स्तर, लोगों के लिए गंभीर श्वसन और हृदय संबंधी जोखिम पैदा करते हैं।’’

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