नयी दिल्ली, 12 मार्च राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर रेल परियोजनाओं को लेकर गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करने और उन्हें दिये जाने वाले कोष में कमी करने का आरोप लगाया।
उच्च सदन में रेल मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों के लिए भारतीय रेलवे एक जीवनरेखा है। उन्होंने अपनी बात बांग्ला में रखी।
उन्होंने कहा कि रेलवे के निजीकरण के प्रयासों के कारण आज रेलवे को यह दिन देखना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आम बजट में रेल शब्द केवल तीन बार सुनने को मिला और उसमें भी रेलवे सुरक्षा के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा गया।
उन्होंने कहा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह कहकर सदन को गुमराह किया है कि गैर भाजपा शासित राज्यों को रेल परियोजनाओं के लिए करोड़ों रूपये दिये गये।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि संप्रग सरकार के शासनकाल में कुल रेल बजट का 1.43 प्रतिशत केरल को दिया गया जो राजग सरकार के शासनकाल में घटकर 1.17 प्रतिशत रह गया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को दिये जाने वाले कोष में भी कमी आयी है।
उन्होंने दावा किया कि रेलवे आंतरिक राजस्व भी अर्जित करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे की निबल आय भी मामूली रही है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में रेलवे बजटीय अनुमान को घटाया गया है।
सेन ने रेल मंत्री वैष्णव को सुझाव दिया कि पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे के सुधार के लिए जो उपाय किए थे, उनको फिर से अपनाया जाना चाहिए जिससे रेलवे की आय बढ़ेगी। उन्होंने रेल मंत्री वैष्णव से अहंकार छोड़ने को कहा।
चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक के एन आर इलांगो ने तमिलनाडु में चल रही विभिन्न रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन की धीमी गति पर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि चाहे आम बजट हो, रेलवे बजट हो या का मुद्दा हो, केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
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