श्रीनगर, आठ अक्टूबर जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ने वाले उमर अब्दुल्ला केंद्र शासित प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। प्रभावशाली अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य उमर बडगाम विधानसभा में जीत चुके हैं और गांदेरबल में आगे चल रहे हैं।
कुछ महीने पहले ही उमर अब्दुल्ला को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता के लिए बड़ी मजबूती प्रदान करने वाले हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के राजनीतिक रूप से कम सक्रिय रहने के साथ ही कई लोगों का मानना था कि यह चुनाव उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक करियर का भविष्य निर्धारित करेगा।
पिछले पांच वर्ष में 54 वर्षीय पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कई बार केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अपनी भागीदारी से इनकार किया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वह केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में प्रवेश करके खुद को अपमानित नहीं करेंगे।
हालांकि, निर्वाचन आयोग द्वारा जम्मू कश्मीर के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद उन्होंने ‘यू-टर्न (रुख बदलना)’ ले लिया। उन्होंने एक नहीं बल्कि दो सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया - गांदेरबल, जो उनके परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ा निर्वाचन क्षेत्र है, और बडगाम।
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के बाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए समर्थन बढ़ता दिखा है और मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के साथ खड़ा दिख रहा है।
पार्टी के गढ़ माने जाने वाले गांदेरबल से चुनाव लड़ना अब्दुल्ला के लिए आसान था, लेकिन वह इस बार जीत का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे और लोकसभा चुनाव की हार को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बडगाम विधानसभा क्षेत्र से भी पर्चा भरा।
कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और गठबंधन में वरिष्ठ घटक दल है। सरकार गठन में उसकी बातों को तवज्जो मिलना लाजमी है।
फारूक अब्दुल्ला ने घोषणा कर दी है कि उमर जम्मू कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
तीन बार (1998, 1999 और 2004 में) लोकसभा सदस्य रह चुके उमर ने लगभग हर चुनावी हार के बाद मजबूत होकर वापसी की है। उन्होंने 2002 के विधानसभा चुनाव में अपने पारिवारिक गढ़ गांदेरबल में एक कम ज्ञात उम्मीदवार - काजी मोहम्मद अफजल से पराजित होने के बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।
अफजल ने ही वन मंत्री के रूप में 2008 में श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को वन भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी थी, जिसके कारण जम्मू और घाटी में क्रमशः इस आदेश के पक्ष और विपक्ष में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इस अवसर का लाभ उठाते हुए अब्दुल्ला ने लोकसभा में जम्मू कश्मीर की स्थिति पर चर्चा के दौरान भाषण भी दिया था। 2008 के अंत में हुए चुनाव में, उन्होंने गांदेरबल में जीत हासिल की और नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।
अब्दुल्ला 38 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया। अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष विधानसभा चुनाव हार जाते, तो 1996 के बाद पहली बार ऐसा होता कि अब्दुल्ला परिवार का कोई भी सदस्य संसद या विधानसभा में नहीं होता।
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