देश की खबरें | लक्ष्मी पुरी की अवमानना ​​याचिका पर तृणमूल सांसद साकेत गोखले को नोटिस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व राजनयिक एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी की अवमानना याचिका पर तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले से जवाब मांगा है।

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व राजनयिक एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी की अवमानना याचिका पर तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले से जवाब मांगा है।

याचिका में माफी मांगने और 50 लाख रुपये का हर्जाना देने के अदालती निर्देश का पालन करने में कथित रूप से विफल रहने पर उनके खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई शुरू करने की मांग की गयी है।

उच्च न्यायालय की एक अलग पीठ ने मानहानि के मुकदमे पर एक जुलाई के फैसले के क्रियान्वयन संबंधी लक्ष्मी की याचिका पर सुनवाई करते हुए गोखले को चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दायर करने को कहा है, जिसमें उन्हें अपनी सभी संपत्तियों का खुलासा करने को कहा गया है।

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने अवमानना ​​याचिका पर नोटिस जारी किया और गोखले को जवाब दाखिल करने को कहा।

पुरी ने अपनी याचिका में कहा कि गोखले ने जानबूझकर उच्च न्यायालय के एक जुलाई के निर्देशों का पालन नहीं किया है और वह दंड पाने के अधिकारी हैं।

उनके वकील ने कहा कि गोखले को उनके खिलाफ एक जुलाई को पारित फैसले के बारे में पूरी जानकारी थी, क्योंकि उन्होंने इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट प्रकाशित किए थे।

न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एकल पीठ ने गोखले को नोटिस जारी कर पुरी की उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें एक जुलाई के फैसले को लागू करने का अनुरोध किया गया है।

पीठ ने कहा, गोखले द्वारा चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दायर किया जाए जिसमें उसकी सभी परिसंपत्तियों, धन, चल एवं अचल संपत्तियों तथा उनके नाम पर बैंक खाते और जमा राशि आदि का पूर्ण खुलासा किया जाए।

पुरी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि गोखले ने अदालत के विशिष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया है और उन्हें 50 लाख रुपये की निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया है।

उन्होंने दलील दी कि एक जुलाई के फैसले के बाद गोखले ने ‘एक्स’ पर पोस्ट भी किया, जिसमें उन्होंने न केवल पुरी के खिलाफ बल्कि अदालत के खिलाफ भी मानहानिकारक बातें कही थीं।

उच्च न्यायालय ने एक जुलाई के फैसले में तृणमूल सांसद को उनके ऊपर लगे आरोप के संबंध में किसी भी सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मंच पर कोई भी सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया था।

यह आदेश संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर पारित किया गया।

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