जरुरी जानकारी | गेहूं उत्पादों के खपत प्रतिरूप का दायरा बढ़ाने की जरूरत: नीति सदस्य
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने मंगलवार को कहा कि गेहूं उत्पादों के उपभोग के प्रचलित तरीकों के विविधीकरण की काफी गुंजाइश है। उन्होंने उद्योग से घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों के लिये बेकरी (ब्रेड आदि) समेत नये उत्पाद लाने की जरूरत पर बल दिया।
नयी दिल्ली, छह जुलाई नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने मंगलवार को कहा कि गेहूं उत्पादों के उपभोग के प्रचलित तरीकों के विविधीकरण की काफी गुंजाइश है। उन्होंने उद्योग से घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों के लिये बेकरी (ब्रेड आदि) समेत नये उत्पाद लाने की जरूरत पर बल दिया।
गेहूं उत्पाद संवर्धन सोसाइटी के वेबिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल संसद में पारित तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं। गौरतलब है कि इन तीनों कृषि कानून के खिलाफ मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान पिछले साल नवंबर के अंत से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान संगठन तीनों कानून को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय ने तीनों कानून के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और समाधान निकालने को लेकर एक समिति का गठन किया है।
चंद ने कहा, ‘‘गेहूं उत्पादों की हमारी खपत ज्यादा व्यापक नहीं है। गेहूं उत्पादों की खपत के विविधीकरण की बहुत गुंजाइश है।’’उन्होंने कहा कि हम भारतीय गेहूं का उपयोग ज्यादातर आटा के रूप में करते हैं। गेहूं के दूसरे उत्पादों पर खर्च बहुत कम है।
चंद ने कहा कि घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजारों के लिये नये उत्पाद खासकर बेकरी उत्पाद पेश करने की जरूरत है।
नीति आयोग के सदस्य ने यह भी कहा कि गेहूं की फसल प्रकृति का एक बड़ा उपहार है।चंद ने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत में गेहूं के उत्पादन की लागत भी बहुत कम है, जबकि गेहूं की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लगभग 2,000 रुपये प्रति क्विंटल है। अत: यह अन्य फसलों की तुलना में सबसे अधिक लाभकारी है। हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि वह किसानों के लिये अधिक एमएसपी के खिलाफ नहीं हैं।
देश में कुपोषण दूर करने के लिए चंद ने कहा कि गेहूं को अधिक पोषक तत्वों से युक्त कर लोगों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराये जा सकते हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)