नयी दिल्ली, नौ मई राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चंडीगढ़ पीठ ने रियल एस्टेट फर्म एम्बैसी ग्रुप की कुछ संपत्तियों का इंडियाबुल्स रियल एस्टेट में विलय किए जाने पर रोक लगा दी है।
मुंबई स्थित इंडियाबुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड (आईबीआरईएल) ने शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी। उसने कहा कि एम्बैसी ग्रुप की एनएएम एस्टेट्स और एम्बैसी वन परियोजनाओं का आईबीआरईएल में विलय संबंधी संस्तुति पर एनसीएलटी की चंडीगढ़ पीठ ने रोक लगा दी है।
उसने कहा कि वह एनसीएलटी के इस फैसले का विधिवत अध्ययन कर अगले कदम के बारे में कोई निर्णय लेगी। उसने कहा कि इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील करने के विकल्प पर भी गौर किया जाएगा।
अगस्त, 2020 में बेंगलुरु स्थित एम्बैसी ग्रुप ने अपनी कुछ आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं का आईबीआरईएल में विलय करने से संबंधित एक पक्का समझौता किया था। इस समझौते के तहत विलय से बनने वाली इकाई का प्रवर्तक एम्बैसी ग्रुप होता।
आईबीआरईएल ने कहा कि इस विलय प्रस्ताव को एनसीएलटी की बेंगलुरु पीठ ने पहले ही स्वीकृति दे दी थी लेकिन चंडीगढ़ पीठ ने रोक लगा दी है। आयकर विभाग ने विलय को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने फरवरी, 2021 में इस विलय प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दी थी।
फिलहाल आईबीआरईएल में एम्बैसी ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत है और विलय प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद यह हिस्सेदारी बढ़कर 45 प्रतिशत हो जाएगी।
प्रेम
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