देश की खबरें | नायडू ने डीआईपीएएस के वैज्ञानिकों से भविष्य की महामारी से निपटने के वास्ते शोध तेज करने का आग्रह किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को कोविड-19 से निपटने में ‘डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड अलाइड साइंसेज’ (डीआईपीएएस) के वैज्ञानिकों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के योगदान की सराहना की और उन्हें भविष्य में इस तरह की किसी भी महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के वास्ते अपने शोध को तेज करने की सलाह दी।

नयी दिल्ली, 30 अगस्त उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को कोविड-19 से निपटने में ‘डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड अलाइड साइंसेज’ (डीआईपीएएस) के वैज्ञानिकों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के योगदान की सराहना की और उन्हें भविष्य में इस तरह की किसी भी महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के वास्ते अपने शोध को तेज करने की सलाह दी।

उपराष्ट्रपति द्वारा उप-राष्ट्रपति निवास में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला, डीआईपीएएस के लगभग 25 वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को आमंत्रित किया गया था। उनके साथ डीआरडीओ के अध्यक्ष जी सतीश रेड्डी भी थे।

नायडू ने उनके साथ बातचीत करते हुए कहा कि महामारी ने जबरदस्त स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है और दुनियाभर में जीवन और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है।

इस समय पर आगे बढ़ने और कोविड-19 के उपचार तथा प्रबंधन के लिए विभिन्न स्वदेशी उत्पादों को विकसित करने के लिए डीआईपीएएस और अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्स-सीओवी-2 के नए स्वरूपों के सामने आने के मद्देनजर भविष्य के किसी भी खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हमेशा सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति सचिवालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सतीश रेड्डी ने नायडू को कोविड-19 के उपचार और प्रबंधन के लिए डीआरडीओ प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित विभिन्न उत्पादों और उपकरणों के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर डीआईपीएएस के निदेशक राजीव वार्ष्णेय भी उपस्थित थे।

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