देश की खबरें | नाहरगढ़ अभयारण्य : एनजीटी के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए न्यायालय राजी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय बुधवार को राजस्थान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग तथा अन्य द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें राज्य को जयपुर में नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, नाहरगढ़ किले के अधिसूचित वन क्षेत्र में संचालित रेस्तरां को बंद करने का निर्देश दिया गया था।

नयी दिल्ली, एक दिसंबर उच्चतम न्यायालय बुधवार को राजस्थान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग तथा अन्य द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें राज्य को जयपुर में नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, नाहरगढ़ किले के अधिसूचित वन क्षेत्र में संचालित रेस्तरां को बंद करने का निर्देश दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वकील को इलाके में ‘लाइट एंड साउंड’ कार्यक्रम बंद करने को कहा। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपीलकर्ताओं-पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग तथा अन्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी से कहा, ‘‘आप वहां गैर वन गतिविधियों की अनुमति क्यों दे रहे हैं।’’

सिंघवी ने पीठ को बताया कि पर्यटक ऐतिहासिक स्मारक को देखने आते हैं और यहां राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) का एक रेस्तरां है जो पिछले 30 साल से चल रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी रेस्तरां के पर्यटकों को वहां जलपान के लिए कुछ नहीं मिलेगा। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस पर सुनवाई करेंगे।’’ पीठ ने कहा, ‘‘आप ‘लाइट एंड साउंड’ कार्यक्रम को रोक दीजिए।’’

शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया और आवेदक से भी जवाब मांगा, जिसके आवेदन पर एनजीटी ने मामले में आदेश पारित किया था। पीठ अब मामले में आठ सप्ताह के बाद सुनवाई करेगी।

अधिवक्ता डी के देवेश के माध्यम से शीर्ष अदालत में दायर अपनी अपील में विभाग और अन्य ने कहा है कि नाहरगढ़ किला जयपुर शहर से लगभग 15 किमी दूर वन क्षेत्र के अंत में स्थित है। आम तौर पर हर साल 7.14 लाख पर्यटक यहां आते हैं। रेस्तरां बंद होने से पर्यटकों के लिए खाने-पीने के सामान जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी हो जाएगी।

एनजीटी ने कहा था कि रेस्तरां, ‘लाइट एंड साउंड’ कार्यक्रम गैर-वन गतिविधियां हैं जिसकी वन क्षेत्रों में अनुमति नहीं हैं और वन्यजीव कानून के लक्ष्यों के भी अनुकूल नहीं हैं।

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