देश की खबरें | नगालैंड शहरी स्थानीय निकाय चुनाव: न्यायालय ने कहा कि कानून का पालन हो

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने नगालैंड विधानसभा द्वारा नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं कराने का प्रस्ताव पारित करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए।

नयी दिल्ली, 18 मई उच्चतम न्यायालय ने नगालैंड विधानसभा द्वारा नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं कराने का प्रस्ताव पारित करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह स्थानीय भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन अधिकारी ऐसा नहीं कर सकते कि देश का कानून कायम नहीं रहे, खासकर तब जब व्यक्तिगत अधिकारों या व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित करने वाली कोई बात नहीं है।

न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह की पीठ राज्य में स्थानीय निकायों के चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

शीर्ष अदालत ने नगालैंड में शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों को अगले आदेश तक रद्द करने वाली 30 मार्च की अधिसूचना पर पांच अप्रैल को रोक लगा दी थी। यह चुनाव लगभग दो दशक बाद 16 मई को होने थे।

जनजातीय संगठनों और नागरिक संस्थाओं के दबाव के बाद, नगालैंड विधानसभा ने नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया और चुनाव नहीं कराने का संकल्प लिया।

राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने अधिनियम के निरस्त होने के मद्देनजर 30 मार्च को पूर्व में अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम को “अगले आदेश तक” रद्द करने की अधिसूचना जारी की।

बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि राज्य के हितों के विपरीत कुछ नहीं हो रहा है और लोग चुनाव में अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र को इस मामले में समाधान निकालना होगा।

पीठ ने कहा, “हम स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए और केंद्र सरकार के रूप में यह आपका कर्तव्य है... आपको इसका समाधान निकालना होगा। हम इस बात की अनुमति नहीं दे सकते कि कानून का पालन न हो।”

उसने कहा, “आप देश के कानून को लागू होने से नहीं रोक सकते, खासकर जब इस संबंध में आपके व्यक्तिगत अधिकारों या व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित करने वाली कोई बात नहीं है।’’

पीठ ने कहा कि जमीनी स्तर पर लोगों के प्रतिनिधि उनके हितों का ख्याल रखेंगे और इसमें किसी को कैसे आपत्ति हो सकती है?

नगालैंड में शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं और पिछला चुनाव 2004 में हुआ था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\