जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में तेजी के बीच अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को अधिकांश तेल-तिलहन (सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल) के दाम सुधार के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, मूंगफली खल के दाम में गिरावट रहने के बीच मूंगफली तिलहन के दाम नीचे आए। मूंगफली खल का लिवाल न होने के कारण मूंगफली तेल का दाम पूर्वस्तर पर बना रहा।

नयी दिल्ली, तीन फरवरी विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को अधिकांश तेल-तिलहन (सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल) के दाम सुधार के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, मूंगफली खल के दाम में गिरावट रहने के बीच मूंगफली तिलहन के दाम नीचे आए। मूंगफली खल का लिवाल न होने के कारण मूंगफली तेल का दाम पूर्वस्तर पर बना रहा।

मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में 2-3 प्रतिशत से ज्यादा मजबूती का रुख था।

बाजार सूत्रों ने कहा कि बिनौला खल का दाम नीचे रहने की वजह से बाकी खल के दाम भी नरम बने हुए हैं और उनमें लिवाली कमजोर है। हाल के दिनों में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा अधिकांशतया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद लागत के हिसाब से कपास से निकले बिनौला सीड की बिक्री करने के बजाय लागत से कम दाम पर सीड की बिकवाली करने से बाकी देशी खलों एवं डी-आयल्ड केक (डीओसी) की कारोबारी धारणा भी कमजोर है। इस स्थिति की वजह से मूंगफली खल के भी लिवाल नहीं रह गये हैं और इसी कारण मूंगफली तिलहन के दाम में गिरावट है।

उन्होंने कहा कि मूंगफली में भी तेल से कहीं अधिक खल निकलता है और खल की मांग या निर्यात मांग नहीं होगी तो पेराई मिलों को पेराई में फायदा नहीं दिखता। इसलिए उनके द्वारा पेराई कम कर दी जाती है और इससे मूंगफली की लिवाली प्रभावित होती है। दूसरी ओर, मूंगफली तेल (जिसे निर्यात की सामग्री माना जाता है) की निर्यात मांग कमजोर होने के बीच मूंगफली तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज की मजबूती के कारण सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार है। मलेशिया में सिर्फ दाम ऊंचे बोले जा रहे हैं पर असल में इस दाम पर कोई लिवाल नहीं है। इसलिए सीपीओ और पामोलीन के दाम मजबूत हैं।

सूत्रों ने कहा कि नकली खल के कारोबार को रोका नहीं गया तो यह पूरे के पूरे तेल-तिलहन उद्योग को भारी क्षति पहुंचा सकता है।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 6,100-6,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 5,250-5,575 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,115-2,415 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,255-2,355 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,255-2,380 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,300 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,900 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,900 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,250-4,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,950-4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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