जरुरी जानकारी | सरसों, बिनौला, सोयाबीन की आवक घटने से अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी में मजबूती के रुख के बीच मंडियों में सरसों, सोयाबीन और बिनौला की आवक घटने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल की थोक कीमतों में सुधार दर्ज हुआ। वहीं कारोबार कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।

नयी दिल्ली, 13 मार्च विदेशी में मजबूती के रुख के बीच मंडियों में सरसों, सोयाबीन और बिनौला की आवक घटने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल की थोक कीमतों में सुधार दर्ज हुआ। वहीं कारोबार कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।

मलेशिया एक्सचेंज में एक प्रतिशत से अधिक का सुधार है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात भी मजबूत बंद हुआ था और फिलहाल इसमें सुधार चल रहा है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि सरसों का उत्पादन इस बार कम है। उसके बावजूद किसानों को अपना सरसों 5,950 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बजाय हाजिर बाजार में 5-7 प्रतिशत नीचे दाम यानी 5,500-5,600 रुपये क्विंटल के भाव बेचना पड़ रहा है। यह बहुत खतरनाक स्थिति है कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 55 प्रतिशत आयात पर निर्भर इस देश के किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम दाम पर बेचनी पड़े। इस विसंगति को समझे और उसका स्थायी निराकरण किये बगैर देश में तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाना असंभव है।

उन्होंने कहा कि बाजार में चर्चा गर्म है कि सरकार 15 मार्च से सरसों की खरीद शुरू करेगी। इन अटकलों के कारण भी आवक घटी है क्योंकि किसान किसी भी सूरत में एमएसपी से कम दाम नहीं चाहते और इसलिए अपनी उपज को रोक रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि कल रात शिकॉगो एक्सचेंज में सुधार रहने की वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया। जबकि मलेशिया एक्सचेंज के एक प्रतिशत से अधिक मजबूत होने के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि बाजार में बिनौले की उपलब्धता कम रह गई है। बिनौला तेल के मुकाबले सूरजमुखी और पामोलीन जैसे आयातित तेलों का दाम 10-15 रुपये किलो अधिक है। कम दाम होने की वजह से मांग बढ़ने के कारण बिनौला तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में कम आवक और सस्ता होने के कारण मांग बढ़ने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 6,140-6,240 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 5,625-5,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,250 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,215-2,515 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,360-2,460 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,360-2,485 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,925 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,575 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,825 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,650 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,150-4,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,850-3,900 रुपये प्रति क्विंटल।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\