देश की खबरें | माओवादी की विधवा ने पति की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता अक्कीराजू हरगोपाल उर्फ आरके की विधवा सिरीशा ने शुक्रवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में छुपे उसके पति का पुलिस ने घेराव किया था, और इस कारण उचित इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।
अमरावती, 15 अक्टूबर भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता अक्कीराजू हरगोपाल उर्फ आरके की विधवा सिरीशा ने शुक्रवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में छुपे उसके पति का पुलिस ने घेराव किया था, और इस कारण उचित इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में स्थित अपने पैतृक गांव में विधवा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘यह सरकार द्वारा की गई हत्या है, यह बीमारी के कारण हुई मौत नहीं है।’’
सिरीशा ने माओवादी सेंट्रल कमेटी द्वारा जारी बयान को खारिज किया है, जिसने कहा था कि किडनी की समस्या से पीड़ित आरके को बेहतर इलाज मुहैया कराने के बावजूद बचाया नहीं जा सका।
सिरीशा ने कहा, ‘‘उन्हें इलाज कैसे मिल सकता था? उनकी मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उन्हें समय पर इलाज नहीं मिला। उनके पास जंगल से निकलने का कोई रास्ता नहीं था क्योंकि उसे पुलिस ने पूरी तरह से घेर रखा था।’’
हालांकि, उसने कहा कि उसे तथ्यों की जानकारी नहीं थी।
माओवादी (पूर्ववर्ती पीपुल्स वार ग्रुप) की सक्रिय सदस्य रह चुकी सिरीशा ने कहा कि उसके पति हमेशा लोगों के लिए काम करते थे।
सिरीशा ने कहा, ‘‘आरके जैसे लोग बिरले ही मिलते हैं, पार्टी (माओवादी) में भी। वह अनुशासन प्रिय और प्रतिबद्ध नेता थे, जिन्होंने हमेशा जनकल्याण के लिए काम किया।’’
आरके से करीबी पहचान वाले रेवोल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन के नेता कल्याण राव ने कहा कि आरके अब दुनिया में नहीं रहे लेकिन वह लोगों के दिलों में हमेशा रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने जंगल का घेराव किया था, इस कारण आरके को समुचित इलाज नहीं मिल सका।
अक्कीराजू हरगोपाल का जन्म आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पलनाडु में हुआ था। स्नात्कोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त आरके शुरुआत में अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए शिक्षक बने, लेकिन धीरे-धीरे नक्सलबाड़ी आंदोलन की कहानियों से प्रभावित होकर 1978 में उन्होंने यह रास्ता चुना।
आरके की मौत 14 अक्टूबर को तड़के हुई।
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