देश की खबरें | बाघों के शिकार पर अंकुश के लिए महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद लेगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के वन विभाग ने बाघों के शिकार से निपटने व चंद्रपुर में इस तरह की घटना के तार शिलांग से जुड़े होने का पता चलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय सहित विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मुंबई, 12 फरवरी महाराष्ट्र के वन विभाग ने बाघों के शिकार से निपटने व चंद्रपुर में इस तरह की घटना के तार शिलांग से जुड़े होने का पता चलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय सहित विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि बाघों के अंगों की तस्करी कर उन्हें म्यांमा और अन्य देशों में भेजे जाने की घटनाएं को देखते हुए यह फैसला किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले महीने चंद्रपुर के राजुरा वन क्षेत्र में एक बाघ के शव साथ शिकार में इस्तेमाल किए गए हथियार मिले थे।

अधिकारी ने बताया कि बाघों के शिकार के मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक व्यक्ति मेघालय के शिलांग से पकड़ा गया था।

केंद्र सरकार की एजेंसी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने एक फरवरी को देश भर के बाघ अभयारण्यों के क्षेत्रीय निदेशकों को "रेड अलर्ट" जारी कर उनसे शिकार पर काबू के लिए गश्त तेज करने का आग्रह किया।

महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने राजुरा में बाघों के शिकार मामले में बहेलिया गिरोह की कथित संलिप्तता पर चर्चा के लिए मंगलवार को यहां अधिकारियों के साथ बैठक की।

उन्होंने कहा कि बाघ शिकार मामले में गिरफ्तार लोगों से गहन पूछताछ की जानी चाहिए।

बैठक में शामिल मुख्य वन्यजीव संरक्षक विवेक खांडेकर ने 'पीटीआई-' से कहा, "राजुरा वन क्षेत्र में बाघ शिकार मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने पाया कि तस्करी के तार शिलांग तक फैले हुए हैं। हमारा अनुभव बताता है कि बाघों की खाल और उनके शरीर के अंगों की तस्करी कभी-कभी सीमा पार म्यांमा, चीन और अन्य देशों में भी की जाती है।"

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