ट्रंप को चुनावों से रोकने के लिए राजद्रोह की धारा में मुकदमा कर सकते हैं उदारवादी समूह

अमेरिका में उदारवादी समूह, ट्रंप के खिलाफ ऐसे मामलों की शुरुआत करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे अगले राष्ट्रपति चुनावों में उनकी उम्मीदवारी मुश्किल में पड़ सकती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिका में उदारवादी समूह, ट्रंप के खिलाफ ऐसे मामलों की शुरुआत करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे अगले राष्ट्रपति चुनावों में उनकी उम्मीदवारी मुश्किल में पड़ सकती है.डॉनल्ड ट्रंप फिलहाल रिपब्लिकन प्रेसिडेंशियल प्राइमरी में सबसे आगे चल रहे हैं. उन्हें रोकने के लिए कुछ उदारवादी समूह और कानूनी जानकार उनके खिलाफ संविधान की राजद्रोह धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराने की बातचीत कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है, तो ट्रंप की चुनावों में उम्मीदवारी पर सवाल खड़े हो सकते हैं.

ये सारे प्रयास 6 जनवरी, 2021 में कैपिटॉल हिल पर हुए हमले में ट्रंप की भूमिका के संदर्भ में किए जा रहे हैं. दरअसल अमेरिका में 14वां संविधान संशोधन ऐसे किसी शख्स के संवैधानिक पद हासिल करने को प्रतिबंधित करता है, जिसने एक बार संविधान के मुताबिक चलने की शपथ ली हो लेकिन फिर राजद्रोह या विद्रोह की गतिविधियों में शामिल हो गया हो.

काफी संख्या में कानूनी जानकार कह रहे हैं कि गृह युद्ध के बाद के दौर में लाई गई यह धारा, ट्रंप के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को पलटने के प्रयासों में उनकी भूमिका पर लागू होती है. क्योंकि उन्होंने अपने समर्थकों को यूएस कैपिटॉल पर चढ़ाई के लिए प्रेरित किया था.

चुनावों के दौरान झेलने पड़ सकते हैं मुकदमे

दो उदारवादी एनजीओ कहते हैं कि इन आपत्तियों के बाद भी चुनाव अधिकारियों को ट्रंप को चुनाव लड़ने का मौका देना चाहिए. ये प्रयास उनके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में मामलों और अपीलों की एक कड़ी शुरू कर देंगे, जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक जाने की राह बनाएंगे. जानकारों का कहना है कि मुमकिन है, 2024 में प्राइमरी के चुनावों के दौरान ऐसा हो रहा हो.

इससे ट्रंप की कानूनी मुसीबतें और बढ़ने की संभावना है. इस बार उम्मीदवारी की दौड़ में सबसे आगे चल रहे ट्रंप पहले ही चार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.

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15 जनवरी के आयोवा कॉकस से रिपब्लिकन उम्मीदवार चुने जाने की दौड़ शुरू होने जा रही है. अब ट्रंप की इसमें भाग लेने की योग्यता भी मुकदमों से प्रभावित हो सकती है. इंडियाना यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर गेरार्ड माग्लिओका कहते हैं, बहुत संभावना है कि ये मामले प्राइमरीज के चुनावों के समय चल रहे होंगे. उनके चुने जाने पर इसका असर हो सकता है.

ट्रंप लगाते हैं "चुनावों में हस्तक्षेप" का आरोप

14वां संशोधन कांग्रेस, सेना, संघीय और राज्य के संवैधानिक पदों पर भी लागू होता है. कानून कहता है कि संवैधानिक पद पर बैठ चुके किसी भी ऐसे इंसान को संवैधानिक पद से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा, जिसने पहले तो संविधान के पालन की शपथ ली हो, पर बाद में "उसी के खिलाफ राजद्रोह या विद्रोह में शामिल हुआ हो या उसके (संविधान के) शत्रुओं को सहायता या शरण दी हो."

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वहीं ट्रंप कह चुके हैं कि उन्हें चुनावों में भाग लेने से रोकने का कोई भी प्रयास "चुनावों में हस्तक्षेप" माना जाएगा. वो न्यू यॉर्क, अटलांटा, वॉशिंगटन डीसी और फ्लोरिडा में अपने खिलाफ चल रहे मामलों को भी ऐसा ही बताते रहे हैं.

एडी/एसएम (एपी)

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