साकेत जिला अदालत में वकीलों के कक्ष चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे
वकीलों की संस्था को जारी एक पत्र में जिला न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा और पूनम ए बांबा ने कहा कि वकीलों को फाइलें और अन्य दस्तावेज लेने के लिए अपने चैंबर में जाने की इजाजत होगी लेकिन जितनी जल्दी संभव हो सके उतनी जल्दी वहां से चले जाना होगा।
नयी दिल्ली, 22 मई देश में कोविड-19 महामारी की वजह से करीब दो महीने की बंदी के बाद साकेत जिला अदालत परिसर में 23 मई से वकीलों के कक्ष चरणबद्ध तरीके से खोले जाएंगे जबकि इस दौरान सामाजिक दूरी के नियमों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। शुक्रवार को जारी एक निर्देश में यह जानकारी दी गई।
वकीलों की संस्था को जारी एक पत्र में जिला न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा और पूनम ए बांबा ने कहा कि वकीलों को फाइलें और अन्य दस्तावेज लेने के लिए अपने चैंबर में जाने की इजाजत होगी लेकिन जितनी जल्दी संभव हो सके उतनी जल्दी वहां से चले जाना होगा।
साकेत बार असोसिएशन के अध्यक्ष करनैल सिंह और सचिव धीर सिंह कसाना को यह पत्र लिखा गया है जिससे वह बार के सभी सदस्यों को चैंबर के इस्तेमाल के दौरान अच्छी सेहत और स्वास्थ्य के लिये सामाजिक दूरी संबंधी सभी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये परामर्श जारी कर सकें।
पत्र में असोसिएशन से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह बुजुर्ग वकीलों से अनुरोध करे कि वे अगले आदेश तक अदालत और चैंबर में आने से बचें।
जिला जजों की बार असोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान 19 मई को हुई चर्चा के बाद वकीलों के कक्षों को चरणबद्ध रूप से खोलने पर फैसला किया गया।
बैठक में वकीलों के कक्षों को खोलने पर विचार हुआ था।
पत्र में सुझाव दिया गया कि वकील सुबह 10 बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक अपने चैंबर में जा सकते हैं। इस दौरान प्रत्येक चैंबर में एक वकील को रहने की इजाजत होगी और अगर एक व्यक्ति दूसरे के साथ कक्ष को साझा करता है तो दूसरा व्यक्ति सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए वहां जा सकता है।
इसमें कहा गया, “कोई सहायक या कनिष्ठ वकील के साथ चैंबर में नहीं होगा…सलाह दी जाती है कि चैंबर का साझा करने वाले आपस में समन्वय कर अलग-अलग समय पर वहां जाएं। अगले आदेश तक मुवक्किलों और इंटर्नों को वकीलों के कक्ष वाले खंड में जाने की इजाजत नहीं होगी।”
पत्र में कहा गया कि अधिवक्ताओं को कक्ष वाले खंड में सिर्फ मुख्य प्रवेश द्वार से ही प्रवेश और निकास करना चाहिए और इस पर अमल हो इस पर नजर वकीलों या उनकी संस्था के स्वयंसेवकों को लेनी चाहिए।
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