देश की खबरें | कर्नाटक : राज्यपाल ने बृहत बेंगलुरु शासन विधेयक को स्पष्टीकरण के लिए लौटाया

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बेंगलुरु, 26 मार्च कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित बृहत बेंगलुरु गवर्नेंस विधेयक को स्पष्टीकरण मांगते हुए सरकार को लौटा दिया है। राज्य के विधि एवं संसदीय कार्यमंत्री एच के पाटिल ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरोध के बावजूद विधानमंडल से पारित इस विधेयक में बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में अधिकतम सात नगर निगमों में विभाजित करके पुनर्गठन का प्रस्ताव है।

इसमें समन्वय और पर्यवेक्षण के लिए बृहत बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के गठन का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसमें महापौर और उप महापौर दोनों का कार्यकाल 30 महीने का होगा।

विधेयक के मुताबिक मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि बेंगलुरू के विकास के प्रभारी मंत्री इसके पदेन उपाध्यक्ष होंगे।

पाटिल ने कहा, ‘‘राज्यपाल ने कुछ स्पष्टीकरण मांगते हुए विधेयक को वापस भेजा है। इसे मंजूरी के लिए स्पष्टीकरण के साथ फिर से राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।’’

उन्होंने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगस्त 2023 से अब तक कुल 119 विधेयक पारित किए गए हैं जिनमें से 83 विधेयकों को कानून के रूप में अधिसूचित किया गया है।

पाटिल ने कहा,‘‘राज्यपाल ने सात विधेयकों पर स्पष्टीकरण मांगा है, चार उनके पास हैं और पांच को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। अभी 20 विधेयक राज्यपाल के पास भेजे जा रहे हैं।’’

राज्यपाल ने रेखांकित किया कि विधेयक में दिल्ली महानगर की तर्ज पर बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका को सात अलग-अलग नगर निगमों में विभाजित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह प्रयोग दिल्ली में विफल हो गया है, और यहां भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए, इसपर गौर करने की सलाह दी जाती है।’’

विधेयक में प्रस्तावित सात नगर निगमों की देखरेख और निगरानी के लिए बृहत बेंगलुरु शासन प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव है। गहलोत ने इस पर कहा कि इससे संविधान के 74वें संशोधन द्वारा प्रदत्त निर्वाचित स्थानीय निकायों की शक्तियों में हस्तक्षेप हो सकता है; इसलिए इस मुद्दे पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

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