देश की खबरें | दिल्ली पुलिस को सूचित किये बिना गिरफ्तारी को लेकर उप्र पुलिसकर्मी को पेश होने का निर्देश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक युवती से उसके परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी करने वाले एक व्यक्ति के भाई और पिता को कथित अपहरण के मामले दिल्ली पुलिस को सूचित किेये बगैर ही गिरफ्तार कर राजधानी से बाहर ले जाने वाले उप्र के पुलिसकर्मी को पेश होने का आदेश दिया है।

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक युवती से उसके परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी करने वाले एक व्यक्ति के भाई और पिता को कथित अपहरण के मामले दिल्ली पुलिस को सूचित किेये बगैर ही गिरफ्तार कर राजधानी से बाहर ले जाने वाले उप्र के पुलिसकर्मी को पेश होने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने दंपति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह एक अति सामान्य कानून है कि दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसे सूचित किए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने साथ ही संबंधित कर्मी को नोटिस जारी किया।

अदालत ने कहा कि यह "दुर्भाग्यपूर्ण" है कि तथ्यों का पता लगाये बिना और यह पता किये बिना कि पक्षकार बालिग हैं या नाबालिग, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां की गईं।

अदालत ने 26 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा, ‘‘कोई यह समझ नहीं पाया कि याचिकाकर्ता नंबर एक बालिग है और उसने अपनी मर्जी से अपने माता-पिता का घर छोड़ा है और उसने याचिकाकर्ता नंबर 2 से शादी की है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 366 और धारा 368 के तहत अपराध कैसे बनता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह पता किये बिना कि याचिकाकर्ता नंबर एक बालिग है या नाबालिग और उससे सही तथ्य पता किये बिना, प्राथमिकी में गिरफ्तारी की गई है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘पुलिस थाना शामली, उत्तर प्रदेश के प्रभारी को नोटिस जारी किया जाए कि वह 28 अक्टूबर, 2021 को व्यक्तिगत रूप से पेश हों और साथ ही थाना शामली, उत्तर प्रदेश में आईपीसी की धारा 366/368 के तहत दर्ज प्राथमिकी संख्या 398/2021 की केस फाइल साथ लायें। यह नोटिस पुलिस थाना ज्योति नगर के एसएचओ द्वारा एसएचओ शामली थाना, उत्तर प्रदेश को लिखित रूप में दिया जाए, जो सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में भी मौजूद रहेंगे।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यह एक सामान्य कानून है कि याचिकाकर्ता नंबर 2 के पिता और भाई को दिल्ली पुलिस को बताए बिना उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और ले नहीं जाया जा सकता।’’

दंपति ने अदालत को बताया कि उन्होंने परिवार की इच्छा के विपरीत बिना किसी दबाव में जुलाई में अपनी मर्जी से शादी की और अब उन्हें धमकियां मिल रही हैं। साथ ही कहा कि लड़के के पिता और भाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ले गई और एक महीने से अधिक समय से उनका कुछ पता नहीं है।

दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि लड़की की मां की शिकायत के संबंध में लड़के के परिवार के सदस्यों को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गत 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था।

उसने कहा कि शामली, उत्तर प्रदेश से पुलिस के दिल्ली आने की कोई सूचना नहीं दी गई थी।

मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

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