जरुरी जानकारी | दूसरों के मुकाबले भारत में वृद्धि दर में नरमी के साथ ऊंची मुद्रास्फीति का जोखिम कम: सीईए
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि भारत के लिये आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के साथ ऊंची मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) का जोखिम नहीं है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।
नयी दिल्ली, 31 मई मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि भारत के लिये आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के साथ ऊंची मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) का जोखिम नहीं है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई विकसित और विकासशील देशों की तुलना में, भारत कुछ हद तक बेहतर स्थिति में है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय बैंक और सरकार, दोनों ही समस्या के समाधान के लिए तत्पर हैं। मैं इस स्तर पर कहूंगा कि भारत के लिए ‘स्टैगफ्लेशन’ का जोखिम बाकी दुनिया की तुलना में काफी कम है।’’
मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान पिछले एक साल में सबसे धीमी गति 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी। वित्त वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही।
लगातार कम होती वृद्धि दर पर नागेश्वरन ने कहा कि ऐसा कोरोना के ओमीक्रोन स्वरूप के कारण है, जिसे देश ने जनवरी में अनुभव किया।
उन्होंने कहा, ‘‘कई लोगों द्वारा जताई गई आशंकाओं और चिंताओं के मद्देनजर सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर से पता चलता है कि गति बरकरार है और यदि आप अप्रैल में जीएसटी आदि के आंकड़ों को देखें, तो आर्थिक गतिविधियों में काफी तेजी है।’’
सीईए ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद को देखते हुए किसी तरह की मंदी की आशंका भी नहीं है।
उन्होंने जोड़ा कि घरेलू वित्तीय क्षेत्र वृद्धि को समर्थन देने के लिए बेहतर स्थिति में है और जैसे-जैसे सुधार गति पकड़ेगा, निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ेगा। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी बाहरी झटके से बचाव में मदद करता है।
सीईए ने कहा, ‘‘चूंकि अभी वित्त वर्ष के दो महीने ही हुए हैं, इसलिए यह अनुमान लगाना अटकलबाजी ही होगा कि अंत में राजकोषीय घाटा कितना होगा। इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि अंतिम आंकड़े वित्त वर्ष 2022-23 के लिए हमारे अनुमानों के करीब ही होंगे।’’
चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
उन्होंने मुद्रास्फीति के संबंध में कहा कि यह लगभग सात प्रतिशत पर है और इस सात प्रतिशत में लगभग दो प्रतिशत महंगाई आयात की वजह से है।
नागेश्वरन ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहेगा, क्योंकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ रही है। इसके अलावा आने वाले महीनों में सब्जियों की कीमतों पर भीषण गर्मी का असर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर मानसून की उम्मीद से ग्रामीण मांग में सुधार होगा।
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