देश की खबरें | कानूनी पेशे में ‘जबरदस्त असमानता’, वकालत पेशे में महज 15 प्रतिशत महिलाएं: न्यायमूर्ति सिंह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने देश में कानूनी पेशे में मौजूद ‘‘जबरदस्त असमानता’’ पर प्रकाश डालते हुए शनिवार को कहा कि वकालत पेशा करने वालों में केवल 15 प्रतिशत महिलाएं हैं।

नयी दिल्ली, पांच अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने देश में कानूनी पेशे में मौजूद ‘‘जबरदस्त असमानता’’ पर प्रकाश डालते हुए शनिवार को कहा कि वकालत पेशा करने वालों में केवल 15 प्रतिशत महिलाएं हैं।

उन्होंने कहा कि यद्यपि विधि स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक छात्राएं हैं, इसके बावजूद वकालत पेशे में उनकी संख्या बहुत कम है क्योंकि उन्हें घर में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

न्यायमूर्ति सिंह ने पूछा, ‘‘वहां भारी असमानता है। हालांकि हमारे विधि कॉलेजों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं और उच्च स्थान प्राप्त करने वाली ज्यादातर लड़कियां हैं, फिर भी नामांकन (अधिवक्ता के रूप में) इतना कम क्यों है?’’

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘‘वकालत पेशे में हमारी कुछ सबसे सक्षम लड़कियां विवाह के बाद कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के लिए इसे छोड़ देती हैं।’’

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि महिला वकीलों को प्रमुख महानगरों को छोड़कर अन्य अदालतों में वकालत करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अदालतों में महिलाओं के लिए ‘‘अपर्याप्त सुविधाएं’’ हैं।

‘महिला वकील दिवस’ मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कानून में महिलाओं को खुद को साबित करने के लिए 100 नहीं बल्कि 120 प्रतिशत देना होगा क्योंकि ऊंचे पदों पर रहने के लिए उन्हें ‘‘अधिक से अधिक सक्षम’’ होना होगा।

कार्यक्रम का आयोजन ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स’ (एसआईएलएफ) और ‘एसआईएलएफ लेडीज ग्रुप’ द्वारा किया गया था।

न्यायमूर्ति सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा, ‘‘कानूनी पेशे में माहौल ऐसा है कि महिलाओं को खुद को साबित करने के लिए 120 प्रतिशत देना पड़ता है।’’

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