देश की खबरें | उद्यान की जमीन पर होटल ‘घोटाला’ : शिवसेना(यूबीटी) विधायक वायकर से छह घंटे तक पूछताछ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिवसेना (यूबीटी) विधायक रविंद्र वायकर से मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शनिवार को उन आरोपों के सिलसिले में करीब छह घंटे तक पूछताछ की जिनमें कहा गया है कि उन्होंने अपने रुतबे का इस्तेमाल कर उद्यान के लिए आरक्षित भूमि पर पंच सितारा होटल बनाने की अनुमति प्राप्त की एवं मुंबई नगर निकाय को नुकसान पहुंचाया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मुंबई, पांच अगस्त शिवसेना (यूबीटी) विधायक रविंद्र वायकर से मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शनिवार को उन आरोपों के सिलसिले में करीब छह घंटे तक पूछताछ की जिनमें कहा गया है कि उन्होंने अपने रुतबे का इस्तेमाल कर उद्यान के लिए आरक्षित भूमि पर पंच सितारा होटल बनाने की अनुमति प्राप्त की एवं मुंबई नगर निकाय को नुकसान पहुंचाया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा में जोगेश्वरी से विधायक वायकर पूर्वाह्न 11 बजे मुंबई पुलिस आयुक्तालय स्थित ईओडब्ल्यू के कार्यालय पहुंचे और शाह पांच बजे निकले। इस दौरान उनसे पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया।
अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि उनके बयान का विश्लेषण किया जाएगा जिसके बाद तय किया जाएगा कि उन्हें पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया जाए या नहीं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता किरीट सोमैया ने इस साल की शुरुआत में शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि वायकर ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर उद्यान के लिए आरक्षित जमीन पर पंच सितारा होटल बनाने की अवैध रूप से मंजूरी ली जिसकी वजह से बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को भारी नुकसान हुआ।
सोमैया ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि यह ‘घोटाला’ करीब 500 करोड़ रुपये का है।
अधिकारी ने बताया कि ईओडब्ल्यू ने बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के उद्यान एवं भवन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जांच से जुड़ने को कहा।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ईडब्ल्यू हर मिलने वाली शिकायत की प्राथमिक जांच करती है, लेकिन इस मामले में अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और जांच जारी है।’’
वायकर 2009 से लगातार तीन बार जोगेश्वरी पूर्व सीट से विधायक हैं और 2014 से 2019 के बीच देवेंद्र फडणवीस मंत्रिमंडल में मंत्री थे।
वह 1992 से 2010 तक बीएमसी पार्षद थे और 2006 से 2010 के बीच निकाय की शक्तिशाली स्थायी समिति के अध्यक्ष थे।
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