जरुरी जानकारी | नीतिगत दर में वृद्धि से आवास ऋण महंगा होगा, मांग पर पड़ सकता है असर: रियल्टी कंपनियां

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि के फैसले से आवास ऋण पर ब्याज बढ़ेगा और सस्ते तथा निम्न मध्यम आय वाले आवास खंड में मांग प्रभावित हो सकती है। जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों ने यह राय जताई है।

नयी दिल्ली, आठ फरवरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि के फैसले से आवास ऋण पर ब्याज बढ़ेगा और सस्ते तथा निम्न मध्यम आय वाले आवास खंड में मांग प्रभावित हो सकती है। जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों ने यह राय जताई है।

हालांकि, कई उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि रिहायशी खंड में मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। उनका यह भी मानना है कि रेपो दर में वृद्धि का यह अंतिम दौर होगा।

रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष संगठन कनडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पटोदिया ने कहा कि ब्याज दर में लगातार वृद्धि से लोगों और कंपनियों के लिये कर्ज लेने की धारणा कमजोर होगी।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के राष्ट्रीय ‘वाइस चेयरमैन’ निरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘‘मई, 2022 के बाद से नीतिगत दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। देश की बढ़ती आर्थिक वृद्धि पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने से पहले इस पर लगाम लगाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि मकान कर्ज पर ब्याज बढ़ने से सस्ते घरों की श्रेणी में मांग पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ‘‘रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़कर 6.50 प्रतिशत हो गयी है। इससे ब्याज बढ़ने से मकानों की मांग पर कुछ प्रतिकूल असर पड़ सकता है...इससे मकान खरीदने वालों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा क्योंकि आवास ऋण की ब्याज दरों में वृद्धि के अलावा, संपत्ति की कीमतें भी हाल की दो से तीन तिमाहियों में बढ़ी हैं।’’

उन्होंने कहा कि रेपो दर में इस वृद्धि के साथ ब्याज दर बढ़कर 9.5 प्रतिशत तक जा सकती है। इससे सस्ते और निम्न मध्यम आय श्रेणी वाले आवासीय खंड में बिक्री प्रभावित हो सकती है।

काउंटी समूह के निदेशक अमित मोदी ने कहा, “हमें लगता है कि आरबीआई के गंभीर प्रयासों के बावजूद, मुद्रास्फीति अब भी चिंताजनक स्तर पर है। लेकिन साथ ही देशभर में पहली बार घर खरीदने वाले लाखों लोग ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वे घर खरीदने को लेकर कदम बढ़ा सकें और अपने भविष्य पर निर्णय ले सकें।’’

एसकेए समूह के निदेशक संजय शर्मा ने कहा, “रेपो दर में लगातार छठी बार बढ़ोतरी हुई है। इससे नीतिगत दर 6.5 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि खरीदार और रियल एस्टेट कंपनियां दोनों ब्याज दरों में स्थिरता चाहती हैं। हमें उम्मीद है कि आरबीआई हमारी मांग पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा।’’

टाटा रियल्टी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजय दत्त ने कहा, ‘‘रियल एस्टेट क्षेत्र के नजरिये से नीतिगत दर में वृद्धि से ब्याज दर और बढ़ेगी। इसके परिणामस्वरूप आने वाली तिमाहियों मकान खरीदने के मामले में कुछ नरमी आ सकती है।’’

उन्होंने सलाह दी कि कंपनियों को कारोबार में संतुलन बनाये रखने तथा मांग की मौजूदा गति को बनाये रखने को लेकर मकान खरीदारों को वित्तीय सहायता देनी चाहिए।

मिग्सन ग्रुप के प्रबंध निदेशक यश मिगलानी ने कहा, “आरबीआई के कदम से आवास कर्ज की ब्याज दरों पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन सबका नई आवासीय परियोजनाओं और आवास की मांग पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’

पिरामिड इन्फ्राटेक के अश्विनी कुमार ने कहा, “नीतिगत दर में बढ़ोतरी थोड़ी निराशाजनक है क्योंकि केंद्रीय बजट में रियल एस्टेट क्षेत्र को कोई बड़ा प्रोत्साहन नहीं दिया गया था, लेकिन क्षेत्र में मांग बढ़ने से परियोजनाओं के बढ़ने की उम्मीद है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘रेपो दर में लगातार बढ़ोतरी से मकान कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, रियल एस्टेट क्षेत्र के स्थिर होने के साथ, खरीदारों का झुकाव आवासीय और वाणिज्यिक दोनों परियोजनाओं की ओर है। आरबीआई रेपो दरों के साथ वैश्विक मुद्रास्फीति को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है और आने वाले समय में नीतिगत दर में वृद्धि रुकने की उम्मीद है।’’

कोलियर्स इंडिया के सीईओ रमेश नायर ने कहा, ‘‘आवास ऋण पर ब्याज दर पहले से आठ से नौ प्रतिशत के उच्चस्तर पर है। साथ ही मकानों की कीमतें आने वाली तिमाहियों में मजबूत बने रहने की संभावना है। हम उम्मीद करते हैं कि रिजर्व बैंक अब रेपो दर में और वृद्धि नहीं करेगा और फलत: गृह ऋण पर ब्याज नहीं बढ़ेगा।’’

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