देश की खबरें | गुजरात: एमएस विश्वविद्यालय ने निष्कासन के विरूद्ध ललित कला छात्र की अर्जी खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात के वड़ोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव (एमएस) विश्वविद्यालय में निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई ने ‘‘आपत्तिजनक’’ कलाकृति पर निष्कासन के विरूद्ध ललित कला पाठ्यक्रम के एक पूर्व विद्यार्थी द्वारा दायर की गई अपील खारिज कर दी है।

अहमदाबाद, छह जुलाई गुजरात के वड़ोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव (एमएस) विश्वविद्यालय में निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई ने ‘‘आपत्तिजनक’’ कलाकृति पर निष्कासन के विरूद्ध ललित कला पाठ्यक्रम के एक पूर्व विद्यार्थी द्वारा दायर की गई अपील खारिज कर दी है।

विद्यार्थी के वकील ने कहा कि इस फैसले को पलटवाने के लिए वह कानूनी उपाय का सहारा लेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय से भी संपर्क करेंगे।

ललित कला संकाय के प्रथम वर्ष के छात्र कुंदन कुमार महतो को मई में विश्वविद्यालय ने उस वक्त निष्कासित कर दिया था जब उसकी कलाकृति पर विवाद खड़ा हो गया था। उसके विरूद्ध धार्मिक भावनाएं कथित रूप से आहत करने को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज की गयी थी।

कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने आरोप लगाया था कि देश में बलात्कार की विभिन्न घटनाओं से जुड़ी अखबार की कतरनों को चिपकाकर उसने हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाए।

महतो के वकील हितेश गुप्ता ने बताया कि उसके मुवक्किल ने अधिकारियों के समक्ष अपील दायर कर उनसे एमएस विश्वविद्यालय अधिनियम के नियमों के मुताबिक अपने फैसले पर पुनर्विचार करने एवं उसे इस पूरे प्रकरण में अपना पक्ष रखने का एक मौका देने की अपील की थी।

गुप्ता ने बताया कि लेकिन एमएसयू सिंडिकेट ने मंगलवार को अपनी बैठक में यह अपील खारिज कर दी । सिंडिकेट या कार्यकारिणी परिषद विश्वविद्यालय की निर्णय लेने संबंधी शीर्ष इकाई है। महतो बिहार का रहने वाला है।

सिंडिकेट के वरिष्ठ सदस्य जिगार इनामदार ने कहा, ‘‘ महतो की अपील खारिज कर दी गयी और परिषद ने उसके निष्कासन पर भी मुहर लगा दी। ’’

परिषद के फैसले पर गुप्ता ने कहा कि वह महतो का निष्कासन रद्द करवाने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय का रुख करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय तथा राष्ट्रपति को भी पत्र लिखेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ संबंधित कलाकृति किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी का हिस्सा नहीं थी। किसी ने उसकी तस्वीर खींच ली एवं उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वह कलाकृति एक विद्यार्थी एवं उसके परीक्षक के बीच का निजी मामला है और यह एमएसयू अधिनियम के तहत अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता है।’’

यह मामला प्रकाश में आने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, हिंदू जागरण मंच एवं कुछ अन्य दक्षिणपंथी संगठनों ने संकाय परिसर में प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि विद्यार्थियों द्वारा बनायी गयी कलाकृतियों में हिंदू देवी-देवताओं का ‘‘आपत्तिजनक’’ तरीके से चित्रण किया गया (तबतक महतो का नाम सामने नहीं आया था)। वायरल तस्वीर के अनुसार यह कलाकृति परीक्षा मूल्यांकन के तहत संकाय परिसर में प्रदर्शित की गयी थी।

कुछ दिनों बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता जयवीर सिंह राउलजी ने पुलिस में शिकायत की और पुलिस ने महतो के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की।

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