चीन में रूसी सैनिकों को दी जा रही ट्रेनिंग पर जर्मनी ने चीनी राजदूत को किया तलब

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जर्मन विदेश मंत्रालय ने बर्लिन में चीनी राजदूत को उन रिपोर्टों के आधार पर बातचीत के लिए बुलाया है जिनमें चीन में रूसी सैनिकों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जर्मन विदेश मंत्रालय ने बर्लिन में चीनी राजदूत को उन रिपोर्टों के आधार पर बातचीत के लिए बुलाया है जिनमें चीन में रूसी सैनिकों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी.जर्मन विदेश मंत्रालय ने 3 जुलाई को बताया कि बर्लिन में चीनी राजदूत को उन मीडिया रिपोर्टों पर तुरंत बातचीत के लिए बुलाया गया, जिनमें दावा किया गया था कि चीन में रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा था. मंत्रालय ने कहा कि ये बेहद परेशान करने वाली मीडिया रिपोर्टें चीनी सरकार, खासतौर से चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन की ओर इशारा करती हैं.

मंत्रालय ने आगे कहा, "कोई भी चीज जो रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपने आक्रामक युद्ध को जारी रखने में सक्षम बनाती है, वह हमारी सुरक्षा के लिए भी खतरा है. नतीजतन, रूस के क्रूर आक्रामक युद्ध के लिए चीन का निर्णायक और बढ़ता समर्थन सीधे तौर पर हमारी सुरक्षा को प्रभावित करता है."

चिंतित है जर्मनी

विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने जर्मन पत्रिका डेर श्पीगल की एक रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा कि जर्मनी ने उन रिपोर्टों पर चीनी राजदूत के साथ तत्काल बातचीत का अनुरोध किया है कि चीन रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित कर रहा है. यह कदम रॉयटर्स की उस रिपोर्ट के दो दिन बाद आया है जिसमें कहा गया था कि चीन ने पिछले साल रूसी रक्षा मंत्री की व्यक्तिगत मंजूरी से रूसी सेना को गुप्त रूप से प्रशिक्षित किया था.

जर्मन सरकार लगातार रूस के लिए चीन के समर्थन पर अपनी चिंता व्यक्त करती रही है. मंत्रालय ने कहा कि यह विशेष रूप से फरवरी में चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की चीन यात्रा के दौरान भी सामने आया था, और उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अपने यूरोपीय भागीदारों के साथ इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं.

चीन से उम्मीद

अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान मैर्त्स ने अपने समकक्ष शी जिनपिंग के सामने यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि चीन, यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए रूस पर दबाव बना सकता है. साथ ही कहा था कि चीन की आवाज पूरी दुनिया में सुनी जाती है और चीन से भेजे गए इशारों को रूस बेहद गंभीरता से लेता है. हालांकि, मैर्त्स ने चीन से सिर्फ उम्मीद की थी कि वह रूस पर सख्ती बरतेगा, उन्हें पूरा भरोसा नहीं था कि चीन यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद करेगा. तब चीन के सरकारी मीडिया ने जानकारी दी थी कि शी जिनपिंग ने मैर्त्स को कहा था कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए सबसे जरूरी कूटनीति है.

इसी साल 20 मई को, जर्मन दैनिक 'डी वेल्ट' ने भी यूरोपीय खुफिया सेवाओं के दस्तावेजों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी थी कि चीनी सेना ने अपने क्षेत्र में कई सौ रूसी सैनिकों को गुप्त रूप से प्रशिक्षित किया था, जिनमें से कुछ को यूक्रेन में तैनात किया गया था. 2022 में शुरू हुआ यूक्रेन और रूस का युद्ध अपने पांचवें साल में है. यूरोपीय देशों की लगातार जारी कूटनीति के बावजूद अब तक इस युद्ध को रोकने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं. खासकर जर्मनी, यूक्रेन युद्ध को रुकवाने के लिए यूरोपीय देशों के दल की लगातार अगुआई करता रहा है. चांसलर मैर्त्स के लिए भी यूक्रेन युद्ध हर विदेश दौरे के चर्चा का मुख्य विषय रहा है.

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