विदेश की खबरें | फ्रांस: ट्यूनीशियाई चरमपंथी को तीन लोगों की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. यह सजा बिना पैरोल के सुनाई गई है और यह फ्रांस में सुनाई गई अब तक की संभवत: सबसे कठोर सजा है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह सजा बिना पैरोल के सुनाई गई है और यह फ्रांस में सुनाई गई अब तक की संभवत: सबसे कठोर सजा है।

ब्राहिम औइसाउई (25) को आतंकी हमले में हत्या करने और हत्या के प्रयास को लेकर आरोपित किया गया था। उसने पेरिस में मुकदमे के दौरान अपना गुनाह कबूल किया था। उसने पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में बताया था कि वह पश्चिमी देशों द्वारा दुनिया भर में मुसलमानों का कत्लेआम किये जाने का बदला लेना चाहता था।

नीस में एक बेसिलिका में तीन लोगों की हत्या की यह घटना उस वर्ष इस्लामी चरमपंथ से जुड़े कई हमलों में से एक थी।

दोषी करार दिये औइसाउई ने 29 अक्टूबर 2020 को 60 वर्षीय नादिन विंसेंट और 44 वर्षीय फ्रांसीसी-ब्राजीलियाई महिला सिमोन बैरेटो तथा चर्च के कर्मी विंसेंट लोकेस (55) की हत्या कर दी थी।

उसने हमले के दौरान, ‘‘अल्लाहु अकबर’’ का नारा लगाया और चाकू लहराया, तभी पुलिस अधिकारियों ने उस पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

यह हमला दो महीने से भी कम समय में तीसरा हमला था, जिसके लिए फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस्लामी चरमपंथियों को जिम्मेदार ठहराया था। इस घटना के कारण फ्रांस सरकार को अपनी सुरक्षा चेतावनी को अधिकतम स्तर तक बढ़ाना पड़ा था।

यह घटना ऐसे समय में हुई, जब फ्रांस में 2015 में व्यंग्यात्मक समाचार पत्र ‘शार्ली एब्दो’ के कार्यालय पर हुए हमलों के मामले में सुनवाई चल रही थी। अखबार ने पैगंबर के व्यंग्यात्मक चित्र प्रकाशित किए थे।

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