देश की खबरें | इंजीनियर रशीद को राहत के लिए सांसद का दर्जा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: एनआईए

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नयी दिल्ली, 17 मार्च राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने सोमवार को कहा कि जेल में बंद सांसद शेख अब्दुल रशीद उर्फ ​​इंजीनियर रशीद को उनके रुतबे का इस्तेमाल करके ‘‘कारावास से बचने’’ की अनुमति नहीं दी जा सकती।

एनआईए ने दिल्ली उच्च न्यायालय में रशीद की उस याचिका पर यह प्रतिक्रिया दी जो उन्होंने एक निचली अदालत के 10 मार्च के आदेश के खिलाफ दायर की थी। निचली अदालत ने उक्त आदेश में रशीद को चार अप्रैल तक लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए अभिरक्षा पैरोल या अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

जांच एजेंसी ने कहा कि बारामूला के सांसद रशीद पर आतंकवाद रोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गंभीर आरोप हैं।

एनआईए ने दलील दी कि रशीद को न तो अंतरिम जमानत दी जा सकती है और न ही अभिरक्षा पैरोल दी जा सकती है, क्योंकि हिरासत में रहते हुए उन्हें संसद सत्र में भाग लेने का कोई अधिकार नहीं है।

जांच एजेंसी ने रशीद पर ‘फोरम शॉपिंग’ और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘‘निर्वाचन क्षेत्र की सेवा’’ करने के उनके इरादे से संबंधित "अस्पष्ट कथनों" के मद्देनजर उन्हें राहत देने का कोई वैध आधार नहीं है।

‘फोरम शॉपिंग’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल वादियों द्वारा अपने मामले की सुनवायी किसी खास अदालत में कराने के लिए किया जाता है, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि उनके पक्ष में फैसला आने की सबसे अधिक संभावना है।

इसमें कहा गया है, ‘‘केवल यह तथ्य कि अपीलकर्ता एक सांसद है, उसे न्यायिक हिरासत में होने के तथ्य से छूट का दावा करने का अधिकार नहीं देता है। कानून में यह अच्छी तरह से स्थापित है कि विधायकों/सांसदों को सदन के सत्र में तब तक भाग लेने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, जब तक कि वे वैध हिरासत में हैं।’’

एनआईए ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के समय, एक विशेष अदालत द्वारा रशीद के खिलाफ मामले में आरोप तय किए गए थे और मुकदमा चल रहा था।

एनआईए ने कहा कि आरोपी को पता था कि वह यूएपीए के तहत दंडनीय गंभीर अपराधों के लिए न्यायिक हिरासत में है और इसलिए लोकसभा सदस्य के रूप में उसके चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने कहा कि इसका इस्तेमाल वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को सेवाएं प्रदान करने की आड़ में अंतरिम जमानत पाने के साधन के रूप में नहीं कर सकते।

रशीद को जम्मू कश्मीर में गवाहों को प्रभावित करने के लिहाज से एक "अत्यधिक प्रभावशाली" व्यक्ति बताते हुए एजेंसी ने कहा, ‘‘धारा 43डी(5) यूएपीए के (तहत) आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है, यदि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आरोपी के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं।"

उसने कहा कि साथ ही अपील यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत निर्धारित दोहरे परीक्षणों को भी संतुष्ट नहीं करती है और तदनुसार, अपील खारिज किए जाने योग्य है।

संसद सत्र में भाग लेने के लिए याचिकाकर्ता को आमंत्रित करने के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए समन को "नियमित मामला" बताया गया, जो सभी सांसदों को भेजा गया था, न कि केवल रशीद को।

एनआईए ने कहा कि रशीद की नियमित जमानत याचिका पर आदेश 19 मार्च को आया था और लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत के लिए उनकी पिछली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। 12 मार्च को, उच्च न्यायालय ने रशीद की अपील पर एनआईए का रुख पूछा था।

रशीद के वकील ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि रशीद को अभिरक्षा पैरोल पर जारी संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जाए, जो पूर्व में दो दिनों के लिये दी गयी राहत के समान है।

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