देश की खबरें | एल्गार परिषद प्रकरण: उच्च न्यायालय ने हनी बाबू की अर्जी निस्तारित की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने चिकित्सकीय देखभाल की मांग कर रहे एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू की अर्जी का शुक्रवार को निस्तारित किया।
एल्गार, छह जनवरी बंबई उच्च न्यायालय ने चिकित्सकीय देखभाल की मांग कर रहे एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू की अर्जी का शुक्रवार को निस्तारित किया।
अदालत ने पिछले महीने बाबू को एक सिटी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने और मेडिकल जांच कराने की अनुमति दी थी।
न्यायमूर्ति एस गडकरी और न्यायमूर्ति पी डी नाईक की खंडपीठ को बताया कि आरोपी की सर्जरी हो गयी है।
अस्पताल से मिले छुट्टी संबंधी बाबू के कागजों का निरीक्षण करने अदालत ने कहा कि ‘‘अब इसमें कुछ बचा नहीं है। याचिका निस्तारित की जाती है।’’
हालांकि पीठ ने जेल प्रशासन को कैदी को नौ जनवरी को फिर इस निजी अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया जैसा कि छुट्टी संबंधी कागजों में मिला है।
अदालत ने हालांकि बाबू की अर्जी निस्तारित करते हुए कहा कि जब से उसने एल्गार परिषद के आरोपी को एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है तब से महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम तथा स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत आरोपित व्यक्तियों की याचिकाओं की बाढ़ आ गयी है।
बाबू पिछले करीब दो सालों से नवी मुंबई की तलोजा जेल में हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि निजी ब्रीच कैंडी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने तथा पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द एवं जोड़ों में दर्द का उपचार कराने के लिए उन्हें तीन महीने की जमानत की जरूरत है।
यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद के सम्मेलन में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि इसी भाषण के बार कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के समीप अगले दिन हिंसा भड़की थी।
पुणे पुलिस ने दावा किया था कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।
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