देश की खबरें | राजस्थान में ई-कचरे की मात्रा काफी बढ़ी : सरकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान में 2018-19 से बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई- कचरे) की मात्रा में काफी वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में मंगलवार को यह जानकारी दी।

जयपुर, 11 मार्च राजस्थान में 2018-19 से बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई- कचरे) की मात्रा में काफी वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में मंगलवार को यह जानकारी दी।

इसके अनुसार 2018-19 से राजस्थान में औसतन 21,953.55 मीट्रिक टन ई-कचरा प्रतिवर्ष उत्पन्न हुआ है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक गोपाल शर्मा ने इस बारे में प्रश्न पूछा था। इसके जवाब में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में 8478.26 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ, इसके बाद 2019-20 में 17,028.19 मीट्रिक टन, 2020-21 में 20,816.76 मीट्रिक टन, 2021-22 में 27,998.25 मीट्रिक टन, 2022-23 में 31,697.41 मीट्रिक टन और 2023-24 में 25,702.46 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ।

विभाग ने बताया कि निपटान के लिए राजस्थान में कुल 23 ई-कचरा प्रसंस्करण इकाइयां (रीसाइक्लर, डिसमेंटलर और रिफर्बिशर) चालू हैं।

सरकार ने बताया कि समावेशी ई-कचरा इकाइयों के लिए जयपुर के जमवा रामगढ़ के थोलाई गांव में एकीकृत रिकवरी पार्क की स्थापना की गई है। ई-कचरा, प्लास्टिक कचरा, बैटरी और अन्य खतरनाक कचरे से बिजली बनाने वाले उद्योगों को भूखंड आवंटित करने का काम किया जा रहा है।

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने यह भी बताया कि राजस्थान सरकार ने विभिन्न माध्यमों से कचरे के संग्रहण को अधिकतम करके ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए राजस्थान ई-कचरा प्रबंधन नीति, 2023 जारी की है।

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