देश की खबरें | दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’, लेकिन दिवाली पर पिछले सात साल में दूसरी सबसे अच्छी हवा

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नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर दिल्ली की वायु गणवत्ता सोमवार को पटाखे फोड़ने, पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी और विषम मौसमी परिस्थितियों के कारण ‘बहुत खराब’ हो गई। विषम मौसमी परिस्थिति से आशय प्रदूषकों के एकत्र होने में सहायक परिस्थिति से है।

हालांकि, 24 घंटों का औसत वायु गणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 321 था, जो दिवाली पर पिछले सात सालों में दूसरा सबसे अच्छा स्तर है।

इसके पहले वर्ष 2018 में राजधानी में दिवाली पर एक्यूआई 281 रिकॉर्ड किया गया था।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक पिछले साल दिवाली पर दिल्ली में एक्यूआई 382 था, जबकि वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 414, वर्ष 2019 में 337, वर्ष 2017 में 319 और वर्ष 2016 में 431 था।

पड़ोसी शहरों गाजियाबाद (301), नोएडा (303), ग्रेटर नोएडा (270), गुरुग्राम (325) और फरीदाबाद (256) में खराब से ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता रही।

गौरतलब है कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’, और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।

अपेक्षाकृत बेहतर हवा का मतलब यह नहीं है कि यह अच्छी हवा है। देश की राजधानी के 25 निगरानी स्टेशन पर अपराह्न चार बजे प्रदूषणकारी तत्व पीएम 2.5 का स्तर प्रति घन मीटर 60 माइक्रोग्राम के राष्ट्रीय मानक का पांच से छह गुना था।

पीएम 2.5 कण 2.5 माइक्रोन या इससे कम ब्यास के बहुत महीन कण होते हैं जो इंसान की श्वसन प्रणाली, फेफड़ों और रक्त प्रवाह में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।

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