मुंबई, 27 फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सत्र अदालत के उस आदेश को “चौंकाने वाला” करार दिया जिसमें बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपियों की कथित ‘मुठभेड़’ की वास्तविकता पर सवाल उठाने वाले मजिस्ट्रेट के निष्कर्षों को स्थगित रखने का आदेश दिया गया था।
मजिस्ट्रेट ने माना था कि आरोपी अक्षय शिंदे को ले जा रहे पांच पुलिसकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने की स्थिति में थे, और बल प्रयोग, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हुई, उचित नहीं था।
पुलिस के अनुसार, जब वे शिंदे को तलोजा जेल से पूछताछ के लिए ठाणे जिले के कल्याण ले जा रहे थे, तो उसने गोली चला दी और पुलिस ने आत्मरक्षा में उसे गोली मार दी।
पुलिसकर्मियों द्वारा मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट को चुनौती दिए जाने के बाद, ठाणे सत्र अदालत ने एक अंतरिम आदेश में, उनके पुनरीक्षण आवेदन की अंतिम सुनवाई तक उनके निष्कर्षों को स्थगित रखा।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ बृहस्पतिवार को आरोपी के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि उनके बेटे की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई थी। पीठ को सत्र अदालत के आदेश की जानकारी दी गई।
पीठ ने पूछा कि जब मामला उच्च न्यायालय के संज्ञान में है तो सत्र अदालत ऐसा आदेश कैसे पारित कर सकती है।
पीठ ने कहा, “जब मामला विचाराधीन है, तो क्या सत्र अदालत पुलिसकर्मियों के आवेदन पर विचार कर सकती है? क्या सत्र न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं किया है? यह न्यायिक अनीति का प्रश्न है।”
न्यायाधीशों ने कहा, “हम नहीं जानते कि क्या कहना है। यह चौंकाने वाला है। क्या राज्य ने सत्र अदालत को यह नहीं बताया कि उच्च न्यायालय इस मामले पर विचार कर रहा है? क्या राज्य सत्र अदालत के आदेश को चुनौती देने की योजना बना रहा है? क्या आप (राज्य) स्तब्ध और हैरान नहीं हैं?”
इस बीच, उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता मंजुला राव को न्यायमित्र (अदालत की सहायता के लिए) नियुक्त किया, क्योंकि शिंदे के माता-पिता ने कहा कि वे मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं।
अदालत ने राव से कई मुद्दों पर अदालत की सहायता करने को कहा, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या राज्य सरकार को मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए।
उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई पांच मार्च को होगी।
अक्षय शिंदे को अगस्त 2024 में ठाणे जिले के बदलापुर में एक निजी स्कूल के शौचालय में दो किंडरगार्टन छात्राओं का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह स्कूल में सहायक था।
एक कथित मुठभेड़ में 23 सितंबर 2024 को उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि उसने पुलिस वैन में मौजूद एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीन ली, गोली चलाई और जवाबी गोलीबारी में मारा गया।
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