देश की खबरें | डार्ट अभियान पृथ्वी को भविष्य में क्षुद्रग्रह की संभावित टक्कर से बचाने की दिशा में एक कदम है: भारतीय वैज्ञानिक

नयी दिल्ली, 27 सितंबर करीब 6.6 करोड़ वर्ष पहले किसी क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराने के कारण डायनासोर जैसे विशालकाय प्राणियों का अंत हो गया था लेकिन अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक भविष्य में धरती को ऐसी किसी संभावित टक्कर से बचाने के प्रयासों में जुटे हैं और डार्ट मिशन इसी दिशा में एक कदम है।

हालांकि भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे जीवनकाल में ऐसी किसी घटना की आशंका बहुत कम है।

अपने तरह के पहले अभियान के तहत नासा के एक अंतरिक्ष यान ‘डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट’ (डार्ट) ने धरती की रक्षा से संबंधित एक परीक्षण में सोमवार को एक क्षुद्रग्रह को सफल टक्कर मारी। यह परीक्षण यह पता लगाने के लिए किया गया था कि भविष्य में पृथ्वी के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले किसी क्षुद्र ग्रह को पृथ्वी से टकराने से रोकने के लिए उसका मार्ग परिवर्तित किया जा सकता है या नहीं।

यह घटना 96 लाख किलोमीटर दूर हुई जिसमें ‘डार्ट’ नामक अंतरिक्ष यान 22,500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही एक अंतरिक्ष चट्टान से टकराया।

इस प्रयोग के तहत डाइमॉरफोस नाम के 160 मीटर व्यास वाले एक उल्कापिंड को निशाना बनाया गया। डाइमॉरफोस वास्तव में डिडमोस नाम के क्षुद्रग्रह का पत्थर है। यह जोड़ी पृथ्वी को खतरे में डाले बिना अनंतकाल से सूर्य की परिक्रमा कर रही है, जिससे वे परीक्षण के लिए आदर्श वस्तु बन गए हैं।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए), बेंगलुरु के वैज्ञानिक क्रिसफिन कार्तिक ने कहा, ‘‘हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए संभावित रूप से खतरनाक हैं। इसलिए, भविष्य में पृथ्वी को ऐसे क्षुद्रग्रहों से संभावित टक्कर से बचाने के लिए अपनी सुरक्षा तैयारी करना बेहतर है।’’

डार्ट परियोजना में शामिल कार्तिक ने कहा कि यह अभियान ‘‘भविष्य की ऐसी किसी संभावित घटना के लिए दुनिया को तैयार करने की दिशा में निश्चित रूप से एक कदम है’’ जो लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले डायनासोर के विलुप्त होने का कारण बनी थी।

कार्तिक ने पीटीआई- से कहा, ‘‘यह सफल डार्ट अभियान उसका एक उदाहरण है। अब हम जानते हैं कि इतने छोटे क्षुद्र ग्रह को अंतरिक्ष यान के जरिये कैसे सटीक रूप से लक्षित करना है। हम इस डार्ट अभियान के प्रभाव के बाद के अवलोकन से खुद को किसी बड़े क्षुद्र ग्रह को टक्कर मारने के लिए भी तैयार कर सकते हैं।’’

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