उन्होंने कहा ‘‘जब दुनिया में यह महामारी फैल रही थी, उस वक्त जांच के लिए हमारे पास केवल एक प्रयोगशाला थी, हमारे पास पीपीई किट नहीं थे। तब महामारी से निपटने की तैयारी करने के लिए और वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन लगाया गया था। तब दूसरे देशों से हमारे पास दवाओं के लिए मांग आई और हमारे यहां से 64 देशों को दवाएं भेजी गईं और हमने देश पर गौरव किया था।’’
मंडाविया ने कहा ‘‘खुद अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा था कि हिंदुस्तान ने संकट के समय हमारी मदद की जिसे हम नहीं भूल सकते। भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘शुभ लाभ’ की संस्कृति को मानने वाला देश है। हमारे साथ साथ दूसरों का भी भला होना चाहिए। यह सोच कर दूसरे देशों को भी टीका दिया गया। इतना ही नहीं, एक साल तक देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न सरकार की ओर से दिया गया। इसमें गैर सरकारी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं और लोगों ने भी मदद की।’’
उन्होंने कहा ‘‘कोरोना योद्धाओं, पुलिस कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी जान पर खेल कर जिस तरह अपने कर्तव्य का पालन किया, उनकी सराहना के लिए और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए हमने ताली, थाली बजाई। ’’
मौत के आंकड़े छिपाने के आरोप को सिरे से नकारते हुए मंडाविया ने कहा ‘‘ये आंकड़े छिपाने का कोई कारण नहीं है। मृत्यु के मामलों का पंजीकरण राज्यों में होता है। राज्य से आंकड़े आने के बाद उन्हें कम्पाइल (संकलित)कर केंद्र प्रकाशित करता है। केंद्र ने किसी भी राज्य को आंकड़े कम बताने के लिए नहीं कहा। ’’
टीके के बारे में मंडाविया ने कहा ‘‘जिस देश में टीका तैयार होगा, रिसर्च होगी, जाहिर है कि वह देश पहले टीका लेगा। भारत बायोटेक और सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने टीका तैयार कर दिखाया। जब देश में टीका तैयार हो रहा है तो अब इसका उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। मैंने इस बारे में स्वयं कंपनियों से बात की। प्रधानमंत्री ने खुद टीका निर्माता कंपनियों, अनुसंधान कंपनियों से बात की। दुनिया के टीकों की तुलना में भारत के टीकों की कीमत कम है। सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया के टीके की 11 से 12 करोड़ खुराक मिलने लगी है। भारत बायोटेक का उत्पादन भी बढ़ रहा है ।’’
उन्होंने कहा कि टीका उत्पादन के लिए आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध होनी चाहिए। ‘‘भारत बायोटेक से हमने उत्पादन की इच्छुक कपंनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करने के लिए कहा। यह प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही इसके अच्छे नतीजे भी मिलेंगे।’’
मंडाविया ने कहा कि दूसरे देशों की अन्य कंपनियों के टीके भारत में उपलब्ध हो सकें, इसलिए नियमों में ढील भी दी गई है।
मंत्री के जवाब के बाद राकांपा के शरद पवार, द्रमुक के तिरूचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और भाकपा के विनय विश्वम ने स्पष्टीकरण पूछे।
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